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यूपी में आंधी-बारिश का कहर…छह की मौत, कानपुर में सबसे ज्यादा तबाही

लखनऊ/मोहनलालगंज, 5 अप्रैल 2026:

प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ली और आंधी-बारिश ने कई जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया। अलग-अलग हादसों में छह लोगों की जान चली गई, जबकि सबसे ज्यादा असर कानपुर में देखने को मिला। यहां तेज आंधी के साथ हुई बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया।

शनिवार को पश्चिमी विक्षोभ के असर से प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवा के साथ बारिश हुई। कानपुर में करीब 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली और 21.4 मिमी बारिश दर्ज की गई। लखनऊ में भी 15 मिमी बारिश हुई, जबकि झांसी में ओले गिरे। बाराबंकी, उन्नाव, इटावा, औरैया, हरदोई, फतेहपुर समेत कई जिलों में भी मौसम का यही हाल रहा। काफी देर तक तेज हवा के साथ बारिश होती रही।

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बारिश के साथ चल रही तेज हवा आंधी में तब्दील हो गई। ग्रामीण इलाकों के साथ शहर में विद्युत आपूर्ति ठप रही। इस दौरान पेड़ गिरने से हुए हादसों में कानपुर में चार लोगों की मौत हो गई। कासगंज में भाई-बहन की जान गई। तेज हवा में टीन शेड उड़ गए वहीं होर्डिंग्स धराशायी हो गए।

कानपुर में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। शहर और आसपास के इलाकों में 200 से ज्यादा पेड़ उखड़ गए। 90 से ज्यादा बिजली के पोल गिरने से सप्लाई बाधित हो गई। दिल्ली-हावड़ा समेत कई रेल रूट पर पेड़ गिरने से 20 से ज्यादा ट्रेनें रास्ते में फंस गईं। बाद में ट्रैक साफ होने पर संचालन बहाल किया गया।

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ग्रामीण इलाकों में इस बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गेहूं, चना, सरसों और अरहर की तैयार फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा और जालौन में खेतों में खड़ी फसल गिर गई या भीगकर खराब हो गई।

मौसम विभाग के मुताबिक 5 अप्रैल से मौसम में थोड़ी राहत मिल सकती है और 6 अप्रैल को मौसम साफ रहने के संकेत हैं। हालांकि 7 से 9 अप्रैल के बीच एक बार फिर आंधी-बारिश का दौर लौट सकता है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम का असर अब सेंट्रल यूपी से पूर्वांचल की तरफ खिसक सकता है।

मोहनलालगंज में फसल चौपट, किसान परेशान

मोहनलालगंज में शनिवार देर रात आई आंधी और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। जिन खेतों में गेहूं की फसल कटने के लिए तैयार थी, वह अब गिरकर खराब हो रही है। कई जगह कटी हुई फसल भी भीग गई, जिससे अनाज के काला पड़ने का खतरा बढ़ गया है।

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इलाके के किसान कृष्ण मोहन तिवारी, रामदेव और रामनरेश ने बताया कि बारिश से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। कटाई का काम चल रहा था, लेकिन अचानक मौसम बदलने से काम रुक गया। जो फसल कटकर खेत में पड़ी थी, वह भीगकर खराब होने लगी है। किसानों का कहना है कि इस वक्त कटाई का समय था, लेकिन बारिश ने पूरी योजना बिगाड़ दी। करीब 30 से 35 फीसदी तक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

रविवार सुबह किसान खेतों में पहुंचकर भीगी फसल को सुखाने में जुटे दिखे। कई किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर फसल तैयार की थी, लेकिन एक रात की बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर मुआवजे की मांग की है।

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