योगेंद्र मलिक
देहरादून, 11 मई 2026:
मानसून सीजन और चारधाम यात्रा को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। सोमवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने सभी विभागों को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में काम करने के निर्देश दिए।
बैठक में सभी जिलों और संबंधित विभागों की तैयारियों की समीक्षा की गई। मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड में मानसून का दौर हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है और इसी समय चारधाम यात्रा भी पूरे जोर पर होती है। ऐसे में किसी भी स्तर पर ढिलाई की गुंजाइश नहीं है।
उन्होंने साफ कहा कि आपदा की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल बिना देर किए घटनास्थल पर पहुंचें। उनके मुताबिक आपदा प्रबंधन में सबसे अहम चीज रिस्पांस टाइम है और इसे और बेहतर बनाना जरूरी है। प्रदेशभर में नालों और नालियों की सफाई को लेकर भी खास निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि मानसून शुरू होने से पहले कम से कम दो बार सफाई कराई जाए, ताकि जलभराव और शहरी बाढ़ जैसी दिक्कतों से बचा जा सके।

सभी जिलों में हाई कैपेसिटी पंप, मोटर बोट, लाइफ जैकेट, रेस्क्यू उपकरण और संचार संसाधन पूरी तरह तैयार रखने को कहा गया। पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ को संवेदनशील इलाकों में पहले से तैनात करने के निर्देश भी दिए गए। चारधाम मार्गों और आपदा संभावित क्षेत्रों में मेडिकल पोस्ट स्थापित किए जाएंगे। यहां डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। मानसून के दौरान जलजनित और संक्रामक बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए।
प्रसव के करीब पहुंच चुकी गर्भवती महिलाओं का पहले से डेटा तैयार करने और उनके लिए चिन्हित स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष इंतजाम करने को कहा गया है, ताकि रास्ते बंद होने की स्थिति में भी समय पर इलाज मिल सके।
पशुपालन विभाग को आपदा की स्थिति में पशुओं के उपचार और बचाव के लिए क्विक रिस्पांस टीम गठित करने के निर्देश दिए गए। मदन कौशिक ने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अहम कड़ी है, इसलिए उनकी सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
राज्य में बढ़ती ट्रेकिंग गतिविधियों को देखते हुए ट्रेकर्स की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया। इसके लिए विस्तृत एसओपी और नई ट्रेकिंग पॉलिसी तैयार करने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि ट्रेकिंग पर जाने वाले हर व्यक्ति का पूरा रिकॉर्ड संबंधित एजेंसियों और यूएसडीएमए के पास होना चाहिए। साथ ही जीपीएस और संचार उपकरण साथ रखना अनिवार्य किया जाए।
मंत्री ने कहा कि मानसून के दौरान बाढ़ और जलभराव की एक बड़ी वजह नदियों में जमा सिल्ट होती है। इसे देखते हुए नदियों की ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन का काम मानसून से पहले हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए। वन क्षेत्रों में डिसिल्टिंग का काम तेज करने और जरूरत पड़ने पर केंद्र स्तर पर समन्वय स्थापित करने को भी कहा गया।






