लखनऊ, 12 अप्रैल 2026:
यूपी भाजपा में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े के आज लखनऊ दौरे ने सियासी सरगर्मी और बढ़ा दी है। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के बीच हुई अहम बैठक ने संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल की अटकलों को नया बल दिया है।
सूत्रों के मुताबिक शनिवार को हुई इस बैठक में पार्टी संगठन से जुड़े लंबित मुद्दों, आगामी चुनावी रणनीति और सरकार-संगठन के बीच बेहतर समन्वय पर विस्तार से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि प्रदेश संगठन को और मजबूत करने के साथ ही कई अहम पदों पर बदलाव की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
इसी कड़ी में विनोद तावड़े का लखनऊ दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में संगठनात्मक ढांचे, विभिन्न मोर्चों में बदलाव और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर गहन मंथन होने की संभावना है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर कई नामों पर चर्चा जारी है और अंदरखाने बैठकों का दौर तेज हो गया है। हालांकि अंतिम फैसला भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। फिलहाल शीर्ष नेतृत्व अन्य राज्यों के चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त है। इसके चलते यूपी से जुड़े फैसलों में कुछ देरी हो रही है।
बताया जा रहा है कि जैसे ही केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलेगी वैसे संगठनात्मक बदलाव और मंत्रिमंडल विस्तार की सूची जारी कर दी जाएगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी दिनों में प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं जो आने वाले चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित करेंगे।
गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली में प्रदेश भाजपा पदाधिकारियों की बैठक और मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई कोर कमेटी की चर्चा के बाद विस्तार का खाका लगभग तैयार बताया जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही निगमों और बोर्डों में पदाधिकारियों के मनोनयन की टाइमलाइन भी तय कर ली गई है।
उधर, संभावित फेरबदल की अटकलों के बीच मंत्री पद के दावेदार सक्रिय हो गए हैं, वहीं मौजूदा मंत्रियों में भी हलचल बढ़ गई है। प्रदर्शन के आधार पर बदलाव की संभावना के चलते कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियों में कटौती या उन्हें बाहर का रास्ता दिखाए जाने की चर्चा है। राजनीतिक गलियारों में यह भी माना जा रहा है कि इस बार कैबिनेट में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर विशेष जोर दिया जाएगा।






