लखनऊ, 4 जनवरी 2026:
समाजवादी पार्टी के मुखिया एवं पूर्व सीएम अखिलेश यादव लगातार भाजपा पर हमलावर हैं। उन्होंने एक बार फिर भाजपा और उसकी ‘डबल इंजन’ सरकारों पर तीखा हमला बोला है। रविवार को उत्तराखंड से लेकर असम, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक भाजपा शासित राज्यों की कथित विफलताओं की एक विस्तृत सूची पेश की। अखिलेश यादव ने जनता से सीधा सवाल करते हुए कहा कि क्या अब भी लोग साम्प्रदायिकता का चश्मा पहनकर भाजपा को वोट देंगे।
अपने पोस्ट की शुरुआत बेहद कड़े शब्दों के साथ करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि जो लोग आंख बंद कर भाजपा का समर्थन कर रहे हैं, अगर उनमें रत्ती भर भी मानवता, विवेक और संवेदना शेष है तो उन्हें अपने घर की बहन-बेटियों की ओर देखकर और आईने में खुद से सवाल करना चाहिए। उन्होंने भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकारों को विकास का मॉडल मानने से इनकार करते हुए उन्हें भ्रष्टाचार, नफरत और अपराध का केंद्र करार दिया।
भाजपा को आँख बंद करके समर्थन व वोट देनेवाले अगर रत्ती भर भी देश प्रेम, संवेदना, शर्म, मानवता, विवेक, ज्ञान और चेतना रखते हों तो निम्नलिखित को पढ़कर ख़ुद से सवाल करें और अपनी बहन, बेटियों, परिवार की ओर देखने के बाद आइने में अपनी आँखों से आँखें मिलाएं:
– भाजपाई डबल इंजन के…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) January 4, 2026
अखिलेश ने अलग-अलग राज्यों की घटनाओं का सिलसिलेवार उल्लेख किया। उत्तराखंड में ‘बेटी’ को न्याय न मिलने के मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने सरकार की संवेदनहीनता पर सवाल उठाया। उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त सिरप कांड और एक जीएसटी अधिकारी के घर से करोड़ों रुपये की नकदी बरामद होने की घटना का हवाला देकर ‘ईमानदार टैक्स सिस्टम’ के सरकारी दावों पर तीखा तंज कसा।
मध्य प्रदेश में दलितों पर हो रहे अत्याचार और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें जलाए जाने की घटनाओं को उन्होंने सामाजिक न्याय पर सीधा हमला बताया। दिल्ली के प्रदूषण संकट पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि राजधानी के लोग एक-एक सांस के लिए तरस रहे हैं लेकिन सरकार गंभीर समाधान देने में विफल रही है।
महाराष्ट्र में विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोके जाने और ‘निर्विरोध’ जीत के इत्तफाक.पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लोकतंत्र के कमजोर होने का आरोप लगाया। बिहार में शराबबंदी के बावजूद सीमांत थानों के कथित संरक्षण में बिक रही अवैध शराब और भ्रष्टाचार को उन्होंने सरकारी नीतियों की विफलता बताया। राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में अरावली पर्वत श्रृंखला को बचाने की लड़ाई, किसानों द्वारा फैक्ट्री की दीवारें तोड़ने जैसी घटनाओं का जिक्र कर उन्होंने पर्यावरण और किसानों की अनदेखी का मुद्दा उठाया। वहीं छत्तीसगढ़ और ओडिशा में अल्पसंख्यकों के त्योहारों पर हमलों और आदिवासियों की जमीन लूटे जाने के आरोप लगाते हुए भाजपा सरकारों को कठघरे में खड़ा किया।
अपने पोस्ट के अंत में अखिलेश यादव ने जनता से अपील की कि अगर उन्हें कुछ और समझ न आए तो वे कम से कम अपने घर के बेरोजगार युवाओं की हताशा, घटते कारोबार और चारों ओर फैले नफरती व हिंसक सामाजिक माहौल पर जरूर विचार करें। उन्होंने कहा कि साम्प्रदायिक उन्माद और महिलाओं व पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज पर बढ़ते अत्याचार देश के भविष्य को अंधकार की ओर ले जा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि इन आंतरिक समस्याओं का असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि पर पड़ रहा है। उनके अनुसार निवेश प्रभावित हो रहा है और विदेशों में रह रहे भारतीयों को अपमान और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। सपा प्रमुख का यह हमला आगामी राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्माने के संकेत दे रहा है।






