लखनऊ, 7 फरवरी 2026:
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। अब आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए लोगों को अस्पतालों या सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार ने योजना को और अधिक जनसुलभ बनाते हुए यह जिम्मेदारी अब कोटेदारों को भी सौंप दी है। इससे घर के नजदीक राशन की दुकान से ही आयुष्मान कार्ड बनवाया जा सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग की पहल पर प्रदेशभर के कोटेदारों को आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। हर कार्ड बनाने पर कोटेदारों को पांच रुपये का मानदेय दिया जाएगा। इसके लिए कोटेदारों को अलग-अलग आईडी और पासवर्ड जारी किए जा रहे हैं। जिलापूर्ति अधिकारी की ओर से सभी कोटेदारों का विवरण स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध करा दिया गया है जिससे जल्द से जल्द उन्हें लॉगिन आईडी प्रदान की जा सके।
आयुष्मान कार्ड निर्माण की इस प्रक्रिया में अब एएनएम, आशा बहू और पंचायत सहायकों के साथ कोटेदार भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। नए प्रावधान के तहत उन परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाए जाएंगे जिनके राशन कार्ड में छह या उससे अधिक यूनिट दर्ज हैं। इसके अलावा 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक भी इस सुविधा के दायरे में आएंगे।
इस योजना के तहत पात्र परिवारों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाता है। कोटेदारों के माध्यम से कार्ड बनने से लाभार्थियों को अब किसी अन्य केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं होगी और इलाज की सुविधा तक उनकी पहुंच और आसान हो जाएगी।
योजना के नोडल अधिकारी डॉ. विनय मिश्रा के मुताबिक आयुष्मान योजना में नए जुड़े पात्र लाभार्थियों और जिनका किसी कारणवश अब तक कार्ड नहीं बन सका है उनकी सूची कोटेदारों को उपलब्ध कराई जा रही है। इसी सूची के आधार पर कोटेदार अपने क्षेत्र के लाभार्थियों से संपर्क कर आयुष्मान कार्ड बनाएंगे।
बताया गया कि आईडी-पासवर्ड जारी होते ही कोटेदार अपने-अपने क्षेत्रों में कार्ड बनाने का कार्य शुरू कर देंगे। सरकार के इस कदम से आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ेगा और आम लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ भी बिना किसी परेशानी के मिल सकेगा।






