बाराबंकी, 5 फरवरी 2026:
हैदरगढ़ टोल प्लाजा विवाद से जुड़े मामले में गुरुवार को जिला न्यायालय परिसर उस समय गरमा गया, जब बार एसोसिएशन के सामूहिक फैसले के खिलाफ जाकर एक अधिवक्ता द्वारा टोलकर्मियों की जमानत याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई। इस खबर के बाद नाराज वकीलों ने हंगामा करते हुए संबंधित अधिवक्ता की मेज और कुर्सियों को आग के हवाले कर दिया।
यह पूरा मामला हैदरगढ़ टोल प्लाजा पर एक अधिवक्ता के साथ हुई मारपीट से जुड़ा है। आरोप है कि टोलकर्मियों ने अधिवक्ता के साथ मारपीट करने के साथ अभद्रता भी की थी। इस घटना से आक्रोशित लखनऊ और बाराबंकी के वकीलों ने संयुक्त रूप से आंदोलन किया था। दबाव के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
घटना के बाद जिला बार एसोसिएशन की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया था कि कोई भी स्थानीय अधिवक्ता आरोपित टोलकर्मियों की पैरवी नहीं करेगा और न ही उनकी जमानत याचिका दाखिल की जाएगी। वकीलों ने इसे अपने सम्मान और एकजुटता से जुड़ा मुद्दा बताया था।
गुरुवार को अधिवक्ताओं को जानकारी मिली कि अधिवक्ता मनोज शुक्ला ने बार एसोसिएशन के फैसले को दरकिनार करते हुए चुपचाप टोलकर्मियों की जमानत याचिका अदालत में दाखिल कर दी है। यह बात फैलते ही न्यायालय परिसर में माहौल तनावपूर्ण हो गया।
सूचना मिलते ही जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा, अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में वकील मनोज शुक्ला की मेज पर पहुंचे। संबंधित अधिवक्ता मौके पर मौजूद नहीं था। गुस्साए वकीलों ने उसकी मेज और कुर्सियों को बाहर सड़क पर फेंक दिया और उनमें आग लगा दी।
हंगामे के दौरान बार अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा ने कहा कि जब पूरे जिले के वकीलों ने एकजुट होकर आरोपियों की पैरवी न करने का फैसला लिया था, तब उसका उल्लंघन करना गलत है। उन्होंने कहा कि यह मामला निजी हित का नहीं, बल्कि साथी अधिवक्ता के सम्मान और बार की एकता से जुड़ा है।






