विकास गोंड
वाराणसी, 26 मार्च 2026:
वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर चैत्र नवरात्र की सप्तमी की रात परम्परागत महाश्मशान महोत्सव मनाया गया। जलती चिताओं के बीच नगरवधुओं ने बाबा मसाननाथ की पूजा अर्चना कर आरती उतारी और भजन गाये।

मणिकर्णिका घाट पर बाबा मसाननाथ का प्रांगण फूलों से सजाया गया। बाबा को तंत्रोक्त विधान से पंचमकार का भोग लगाया गया और भव्य आरती की गई। मान्यता है कि अकबर के नवरत्नों में से एक राजा मानसिंह ने काशी में बाबा मसाननाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। उस दौर में राजा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना चाहते थे, लेकिन कोई भी कलाकार श्मशान में प्रदर्शन के लिए तैयार नहीं हुआ। तब काशी की नगरवधुओं ने यह जिम्मा उठाया और अपनी कला से बाबा के दरबार को सजाया।

समय के साथ इस परंपरा में एक और विश्वास जुड़ गया। माना जाने लगा कि नृत्य के जरिए बाबा की आराधना करने से अगले जन्म में इस जीवन से मुक्ति मिल सकती है। यही वजह है कि अलग-अलग धर्मों से जुड़ी नगर वधुएं भी यहां आकर अपनी अर्जी लगाती हैं। नगर वधु पप्पू सिंह ने बताया कि यह उनके लिए सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि अपनी पीड़ा और उम्मीद को बाबा तक पहुंचाने का जरिया है। वहीं मंदिर के व्यवस्थापक गुलशन कपूर के अनुसार, यह परंपरा सालों से चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।




