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सस्पेंशन के बाद सिटी मजिस्ट्रेट का खुला विद्रोह : कलक्ट्रेट गेट पर धरना, डीएम पर बंधक बनाने का आरोप

माघ मेले में शंकराचार्य के कथित अपमान और यूजीसी कानून के विरोध में अलंकार अग्निहोत्री ने दिया था इस्तीफा, इसके बाद शासन ने कर दिया निलंबित, अब बरेली में शासन-प्रशासन के खिलाफ खोल दिया मोर्चा

बरेली, 27 जनवरी 2026:

यूपी के बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने शासन-प्रशासन के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए मंगलवार को अपने समर्थकों के साथ जोरदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को इस्तीफा देने का ऐलान किया था। उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे शंकराचार्य के कथित अपमान और यूजीसी कानून के विरोध को कारण बताया है। देर रात डीएम से मुलाकात के बाद उन्होंने जिला प्रशासन पर बंधक बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। उन्हें डीएम ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके कुछ ही घंटों बाद रात में उन्हें निलंबित कर दिया गया।

निलंबन की कार्रवाई के बाद मंगलवार को अलंकार अग्निहोत्री और मुखर हो गए। सुबह उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। एडीएम कंपाउंड स्थित उनके आवास का मुख्य गेट पुलिस ने बंद कर दिया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों का कहना था कि यह कार्रवाई ऊपर से मिले निर्देश के तहत की गई है। इससे नाराज उनके समर्थकों ने दामोदर पार्क में जुटान का आह्वान किया।

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करीब 11 बजे एडीएम सिटी सौरभ दुबे, एसपी देहात मुकेश चंद मिश्रा, एसडीएम सदर प्रमोद कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उनके आवास पर पहुंचे। इसके बाद अलंकार अग्निहोत्री अपने आवास से पैदल ही समर्थकों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे और धरने पर बैठ गए।

जब वह डीएम से मिलने कलक्ट्रेट पहुंचे तो मुख्य गेट बंद मिला। इसके बाद अलंकार अग्निहोत्री गेट के बाहर ही जमीन पर बैठ गए और करीब एक घंटे तक धरना दिया। इस दौरान नारेबाजी भी होती रही। बाद में वह धरने से उठकर समर्थकों के साथ कलक्ट्रेट सभागार पहुंचे और डीएम चेंबर के सामने बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालात को देखते हुए सभागार से मीडिया कर्मियों को बाहर कर दिया गया और डीएम के आने का इंतजार किया जाता रहा।

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अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ साजिश रची गई। जब यह साजिश नाकाम रही और वह इस्तीफे पर अड़े रहे तो रातों-रात निलंबन आदेश जारी कर दिया गया। उन्होंने साफ कहा कि वह निलंबन के खिलाफ हाईकोर्ट और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। प्रशासनिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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