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यूपी में गौ-आश्रय स्थलों की देखभाल अब और होगी जिम्मेदाराना, इन सुविधाओं पर दिया जा रहा है खास ध्यान

उत्तर प्रदेश सरकार ने गौ-आश्रय स्थलों की सुरक्षा और प्रबंधन को मजबूत किया है, जिसमें सीसीटीवी निगरानी, कंट्रोल रूम और ठंड से बचाव जैसी विशेष सुविधाएं शामिल हैं

लखनऊ, 9 जनवरी 2026:

उत्तर प्रदेश सरकार ने गौ-आश्रय स्थलों की निगरानी, प्रबंधन और सुविधाओं को सुदृढ़ कर गोवंश के संरक्षण को और मजबूत किया है। सीसीटीवी निगरानी, कंट्रोल रूम और ठंड से सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं के जरिए गोवंश की देखभाल और जिम्मेदाराना बनाई जा रही है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने गौ-आश्रय स्थलों की निगरानी और प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने का काम तेज कर दिया है। प्रदेश के कुल 75 जनपदों में मौजूद 6718 ग्रामीण गौ-आश्रय स्थलों में से 65 जनपदों के 4366 स्थलों पर सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा चुका है। शेष जनपदों में भी यह निगरानी प्रणाली चरणबद्ध तरीके से सुदृढ़ की जा रही है। thehohalla news 

यूपी सरकार निराश्रित गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। सभी गौ-आश्रय स्थलों पर शेड, स्वच्छ भोजन और पेयजल, खड़ंजा एवं भूसा भंडार, उपचार कक्ष, प्रकाश और सोलर लाइट जैसी सुविधाओं को व्यवस्थित और मजबूत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य गोवंश की देखभाल को और अधिक जिम्मेदाराना और प्रभावी बनाना है।

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पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम के मुताबिक हरदोई, आगरा, जालौन, झांसी, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली, जौनपुर, अयोध्या, आजमगढ़, पीलीभीत, कौशांबी, शामली, बस्ती, अंबेडकरनगर, बलिया, एटा, अमरोहा, फर्रुखाबाद और चंदौली में विकास भवनों में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। शेष जनपदों में भी यह व्यवस्था धीरे-धीरे लागू की जा रही है। इन कंट्रोल रूम से गौ-आश्रय स्थलों की गतिविधियों पर सतत नजर रखी जा रही है और किसी भी लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई की जा सकती है।

गौ-आश्रय स्थलों को ठंड और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों से सुरक्षा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हर स्थल पर हरा चारा, तिरपाल, काउ-कोट, अलाव, औषधियां, उपचार सुविधाएं और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार सुनिश्चित कर रही है कि ठंड अथवा व्यवस्थागत कमी के कारण किसी भी गोवंश की मृत्यु न हो।

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