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साइबर फ्रॉड एक चुनौती, सजगता है जरूरी

अपना पर्सनल लैपटॉप या मोबाइल किसी अनजान व्यक्ति को न दें, क्योंकि इनमें आपकी निजी और संवेदनशील जानकारी होती है।

Cyber Fraud is a Challenge Vigilance is Essential

                            मनोज श्रीवास्तव

आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और इंटरनेट हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही से व्यक्ति आर्थिक नुकसान, पहचान की चोरी, ब्लैकमेलिंग या मानसिक उत्पीड़न का शिकार हो सकता है। इसलिए साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है।

टू-स्टेप वेरिफिकेशन है सबसे जरूरी

सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण सावधानी है सोशल मीडिया ऐप या अकाउंट में टू-स्टेप वेरिफिकेशन (2-Step Verification) का उपयोग। विशेष रूप से व्हाट्सएप, फेसबुक, ई-मेल और बैंकिंग ऐप्स में यह सुविधा अवश्य सक्रिय होनी चाहिए। टू-स्टेप वेरिफिकेशन में पासवर्ड के साथ-साथ एक अतिरिक्त कोड या पिन की आवश्यकता होती है, जिससे यदि पासवर्ड किसी तरह लीक भी हो जाए, तब भी अकाउंट सुरक्षित रहता है। व्हाट्सएप पर 6 अंकों का पिन लगाकर अकाउंट हैक होने की संभावना काफी कम हो जाती है।

ई-मेल और डिवाइस की सुरक्षा

दूसरी महत्वपूर्ण सावधानी है ई-मेल और डिवाइस की सुरक्षा। अपना ई-मेल किसी साइबर कैफे, होटल, दोस्त के मोबाइल या सार्वजनिक कंप्यूटर पर लॉग-इन करके कभी भी खुला न छोड़ें। उपयोग के बाद तुरंत लॉग-आउट करें। यदि पुराना मोबाइल किसी को देना हो, तो पहले उसे पूरी तरह फॉर्मेट करें और उसमें से सभी ई-मेल, सोशल मीडिया, बैंकिंग ऐप्स और डाटा हटा दें। अपना पर्सनल लैपटॉप या मोबाइल किसी अनजान व्यक्ति को न दें, क्योंकि इनमें आपकी निजी और संवेदनशील जानकारी होती है।

आधार कार्ड की सुरक्षा

तीसरी सावधानी है आधार कार्ड की सुरक्षा। आजकल कई जगह पहचान के लिए आधार मांगा जाता है। ऐसी स्थिति में पूरा आधार कार्ड देने के बजाय केवल मास्क्ड आधार (Masked Aadhaar) ही दें, जिसमें अंतिम के केवल चार अंक दिखाई देते हैं। यह मास्क्ड आधार UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट से आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। पूरा आधार साझा करने से पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा बढ़ जाता है।

सोशल मीडिया पर सीमित जानकारी

चौथी सावधानी सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत जानकारी सीमित रखना है। फेसबुक, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने घर का पता, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, बच्चों की जानकारी, यात्रा की योजना या आर्थिक स्थिति जैसी जानकारियाँ सार्वजनिक न करें। अपनी फ्रेंड लिस्ट को “Only Me” या “Friends” तक सीमित रखें, ताकि अनजान लोग आपकी प्रोफाइल का गलत इस्तेमाल न कर सकें। फर्जी प्रोफाइल और अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट से विशेष सावधानी बरतें।

लालच और डर से बचें

पाँचवां महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि साइबर फ्रॉड का मुख्य कारण लालच, भय और सोशल मीडिया पर अंधविश्वास होता है। “लॉटरी लग गई”, “इनाम जीता”, “बैंक अकाउंट बंद हो जाएगा”, “तुरंत लिंक खोलें” जैसे मैसेज अक्सर धोखाधड़ी के लिए भेजे जाते हैं। ऐसे मैसेज, कॉल या ई-मेल पर बिना जांच-पड़ताल के विश्वास न करें। सोशल मीडिया और इंटरनेट को हमेशा संदेह की दृष्टि से देखना चाहिए।

UPI और डिजिटल पेमेंट सुरक्षा

छठी और अत्यंत आवश्यक सावधानी है UPI और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी सुरक्षा। यदि आपके खाते में किसी अनजान व्यक्ति से अचानक पैसे आ जाएँ, तो तुरंत बैलेंस चेक करने के लिए UPI पिन न डालें। कई बार साइबर अपराधी नकली रिक्वेस्ट या लिंक के माध्यम से पिन डलवाकर अकाउंट खाली कर देते हैं। अनजान पेमेंट आने पर बैंक या कस्टमर केयर से संपर्क करें। कभी भी किसी को UPI पिन, OTP या कार्ड डिटेल न बताएं।

गलत UPI पेमेंट की शिकायत

सातवां, यदि आपने UPI से गलत पेमेंट कर दिया है तो RBI के टोल फ्री नम्बर 18001201740 पर 48 घंटे के अन्दर कॉल कर लें और NPCI वेबसाइट पर UPI की शिकायत दर्ज कर लें।

संचार साथी ऐप है फोन का पहरेदार

आठवां, सरकारी ऐप “संचार साथी” को डाउनलोड कर लें। इसे फोन का पहरेदार कहते हैं। इसके माध्यम से साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज कर सकते हैं, फोन चोरी होने पर रिपोर्ट भी दर्ज कर सकते हैं।

MOBI ARMOUR ऐप फ्रॉड से बचाएगा

नवां, MOBI ARMOUR ऐप साइबर फ्रॉड से बचाने में मदद करता है। संदेहास्पद लिंक और बारकोड को चेक किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें, जिसमें अक्षर, अंक और विशेष चिन्ह शामिल हों। एक ही पासवर्ड सभी ऐप्स में न रखें। समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहें। अनजान लिंक, फाइल या QR कोड स्कैन करने से बचें। मोबाइल और कंप्यूटर में एंटी-वायरस और सॉफ्टवेयर अपडेट रखें।

अंत में यही कहा जा सकता है कि साइबर क्राइम से बचाव का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता और सतर्कता है। थोड़ी-सी सावधानी हमें बड़े नुकसान से बचा सकती है। डिजिटल सुविधाओं का उपयोग करें, लेकिन समझदारी और सुरक्षा के साथ।

(लेखक उत्तराखंड विधानसभा के मीडिया सेंटर में उप निदेशक के पद पर तैनात हैं। इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं)

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