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डी-रेगुलेशन 1.0 : पहले पायदान पर पहुंचा UP, निवेश प्रक्रिया हुई आसान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को नया आयाम

योगी सरकार के व्यापार सुधारों की केंद्र सरकार ने की सराहना, सरकार की तरफ से सभी 23 प्राथमिक सुधारों का प्रदेश में क्रियान्वयन पूर्ण किया गया, इसके जरिये प्रदेश में निवेशकों के लिए निवेश प्रक्रियाओं को आसान किया, सुधारों से पारदर्शिता को मिला बढ़ावा

लखनऊ, 6 जनवरी 2026:

यूपी ने एक और उपलब्धि अपने नाम की है। यूपी ने केंद्र सरकार के डी-रेगुलेशन 1.0 कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह रैंकिंग व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और निवेश अनुकूल बनाने के उद्देश्य से 23 प्रमुख प्राथमिक सुधार क्षेत्रों के प्रभावी और समग्र क्रियान्वयन के आधार पर जारी की गई है। इस रैंकिंग के आधार पर यूपी देश में पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने सभी 23 सुधारों को पूर्ण रूप से लागू किया है।

भारत सरकार की तरफ से देश भर के राज्यों का भूमि, भवन एवं निर्माण, श्रम, यूटिलिटीज और विभिन्न अनुमतियों से जुड़े पांच प्रमुख क्षेत्रों का मूल्यांकन किया गया था। जिसमें यूपी को पहला स्थान मिला है। इन क्षेत्रों में लागू सुधारों से निवेश सुगम हुआ है और व्यापारिक स्थितियां और मजबूत हुई हैं। thehohalla news 

भूमि संबंधी सुधारों के तहत राज्य में मिश्रित उपयोग विकास को बढ़ावा देने के लिए फ्लेक्सिबल जोनिंग फ्रेमवर्क अपनाया गया है। भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए इसे पूरी तरह डिजिटल किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के मानक तय किये गए हैं ,साथ ही उपलब्ध औद्योगिक भूमि का जीआईएस आधारित लैंड बैंक विकसित कर उसे इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक से जोड़ा गया, जिससे निवेशकों को सटीक और पारदर्शी जानकारी मिल रही है।

औद्योगिक और वाणिज्यिक भूखंडों में निर्माण सम्बन्धी नियम और विनियमों में भूमि हानि को कम करने के उद्देश्य से भवन विनियमों में संशोधन किया गया है। अलग-अलग विभागों से एनओसी और परमीशन लेने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। इन प्रक्रियाओं में सूचीबद्ध थर्ड पार्टी संस्थाओं की भूमिका को मजबूत किया गया, जिससे काम की समयसीमा कम हो गई है। अनुमोदन की समय-सीमा में उल्लेखनीय कमी आई है।

योगी सरकार ने श्रम सुधारों के अंतर्गत कई उद्योगों में महिलाओं के काम करने पर लगी रोक को हटा दिया है। अब महिलाएं रात में भी कुछ विशेष सहूलियतों के साथ काम कर रही हैं। इसका असर वाणिज्यिक संस्थानों पर भी पड़ा, जहां अब श्रमबल में बढ़ोत्तरी हुई है। इसके अतिरिक्त दुकान एवं स्थापना अधिनियम के अंतर्गत श्रमिकों की न्यूनतम सीमा बढ़ाकर 20 या उससे अधिक कर दी गई है। https://thehohalla.com/cm-yogi-to-conduct-major-review-of-mission-karmayogi/

उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण से जुड़े प्रमाणपत्र और अनुमतियों को ऑनलाइन माध्यम से जारी करने की व्यवस्था लागू की गई। अब प्रकारखाना और व्यापार लाइसेंस की स्वीकृति ऑनलाइन माध्यम से आसानी से हासिल की जा सकती है। राज्य में उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार (प्राविधानों में संशोधन) अधिनियम 2025 लागू किया गया है। इसके साथ ही सभी राज्य स्तरीय सेवाओं को राज्य सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से एकीकृत किया गया है। इन पहलों ने सुधारों के पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाया है।

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