Entertainment

पुण्यतिथि विशेष: टाइम मैगजीन के कवर से तन्हा मौत तक, जानिए परवीन बाबी की दर्दनाक कहानी

सुपरस्टार परवीन बाबी की जिंदगी शोहरत से अकेलेपन और मानसिक संघर्ष तक पहुंची, जिसका अंत बेहद दर्दनाक रहा। ग्लैमर की दुनिया की यह चमकदार हस्ती आखिरकार तन्हाई में तीन दिन तक अनदेखी पड़ी रही

मनोरंजन डेस्क, 20 जनवरी 2026:

70 के दशक की जिस अदाकारा को कभी लाखों दिलों की धड़कन कहा जाता था, उसकी जिंदगी का अंत बेहद डरावना और दर्दनाक रहा। शोहरत की ऊंचाइयों से अकेलेपन की गहराइयों तक पहुंची यह एक्ट्रेस कभी पागलखाने में बंद कर दी गई, कभी बिना कपड़ों के सड़कों पर भटकती दिखी, और मौत के बाद तीन दिनों तक उसकी लाश उसी फ्लैट में पड़ी रही-जिसे देखने या पूछने वाला कोई नहीं था। यह कहानी सिर्फ एक एक्ट्रेस की नहीं, बल्कि उस क्रूर सच की है, जो ग्लैमर की चकाचौंध के पीछे छुपा रहता है। ये कहानी है अदाकारा परवीन बाबी की, जिनकी आज पुण्यतिथि है।

नवाबी खानदान से बॉलीवुड की चमक तक

जूनागढ़ के नवाबी परिवार में जन्मी परवीन बाबी ने जब फिल्मी दुनिया में कदम रखा, तो ग्लैमर की परिभाषा ही बदल दी। 4 अप्रैल 1954 को गुजरात के जूनागढ़ में जन्मीं परवीन ने महज 18 साल की उम्र में मॉडलिंग शुरू की थी। फिल्म ‘मजबूर’ से उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री ली, जिसमें उनके साथ अमिताभ बच्चन नजर आए। यही फिल्म उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट बनी।

WhatsApp Image 2026-01-20 at 9.33.59 AM

सुपरस्टार्स के साथ सुपरहिट करियर

परवीन बाबी की जोड़ी सिल्वर स्क्रीन पर सबसे ज्यादा अमिताभ बच्चन के साथ पसंद की गई। उन्होंने ‘दीवार’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘शान’, ‘नमक हलाल’ और ‘काला पत्थर’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया। वह पहली भारतीय अभिनेत्री थीं, जो टाइम मैगजीन के कवर पर छपीं। वेस्टर्न लुक को बॉलीवुड में लोकप्रिय बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा।

शोहरत के पीछे छुपा मानसिक संघर्ष

करियर की ऊंचाइयों के साथ परवीन बाबी की निजी जिंदगी में अकेलापन और मानसिक परेशानी बढ़ने लगी। वह सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझने लगीं। धीरे-धीरे उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली। फिल्ममेकर महेश भट्ट ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक बार बहस के बाद परवीन उन्हें रोकने के लिए बिना कपड़ों के ही सड़क पर उनके पीछे दौड़ पड़ी थीं। महेश भट्ट ने इस दौरान उनका इलाज भी करवाया और मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़े रहे।

न्यूयॉर्क में पागलखाने तक पहुंची कहानी

साल 1983 में जब परवीन बाबी अपने करियर के शिखर पर थीं, वह अचानक गायब हो गईं। बाद में पता चला कि न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर अजीब व्यवहार के कारण पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पागलखाने में भर्ती करा दिया था। हालत यह थी कि पूछे जाने पर वह अपना नाम तक नहीं बता पा रही थीं।

WhatsApp Image 2026-01-20 at 9.33.59 AM (1)

तीन दिन तक फ्लैट में पड़ी रही लाश

परवीन बाबी की जिंदगी की सबसे दुखद कहानी 20 जनवरी 2005 को खत्म हो गई। मुंबई के जुहू स्थित उनके फ्लैट के बाहर दो दिनों तक दूध के पैकेट और अखबार जमा होते रहे। जब बदबू फैलने लगी, तब पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। अंदर परवीन बाबी की सड़ी हुई लाश मिली। डॉक्टरों के अनुसार उनकी मौत तीन दिन पहले हो चुकी थी और पैर में गैंग्रीन हो गया था। 50 साल की उम्र में अकेलेपन के साथ उनकी दर्दनाक कहानी खत्म हो गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button