लखनऊ, 8 फरवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में साइबर जालसाजों का एक और हथकंडा सामने आया है। ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर जालसाजों ने नगर निगम के एक रिटायर इंस्पेक्टर से 80 लाख रुपये ठगने की साजिश रची गई। खुद को डीआईजी और एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस) पुणे का अधिकारी बताने वाले जालसाजों ने पहलगाम आतंकी हमले में टेरर फंडिंग का आरोप लगाकर बुजुर्ग को करीब ढाई घंटे तक मानसिक दबाव में रखा। बैंक कर्मचारियों की सतर्कता से वह बड़ी ठगी का शिकार होने से बच गए।
जानकारी के मुताबिक आशियाना निवासी एवं मूल रूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले छेदीलाल के मोबाइल पर सुबह अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस पुणे का इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड से खुले खातों से 40 लाख रुपये की आतंकी फंडिंग हुई है। इसके बाद उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने और किसी को भी जानकारी न देने की चेतावनी दी गई। कुछ ही देर में वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति पुलिस वर्दी में डीआईजी बनकर सामने आया और खातों, एफडी व जमा रकम की पूरी जानकारी ली।
जालसाजों ने जांच के नाम पर तत्काल रकम बताए गए खातों में ट्रांसफर करने का दबाव बनाया। जेल जाने के डर से घबराए छेदीलाल गोमतीनगर स्थित महाराष्ट्र बैंक की शाखा पहुंचे और एक कोने में बैठकर 80 लाख रुपये निकालने की तैयारी करने लगे। इस दौरान सर्दी में भी उनके माथे पर पसीना देखकर एक बैंक कर्मी को शक हुआ। सूचना पर विधि अधिकारी मनीष सिंह पहुंचे और समझाने पर छेदीलाल ने पूरी घटना बताई।
इसी बीच जालसाजों की फिर वीडियो कॉल आई। मनीष सिंह ने फोन उठाकर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर ठगी करने पर कड़ी फटकार लगाई। इसके बाद ठगों ने कॉल काट दी। मामले की शिकायत साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराई गई है। इस तरह सतर्कता के चलते छेदीलाल लाखों की साइबर ठगी का शिकार होने से बच गए।






