लखनऊ, 10 फरवरी 2026:
दुधवा नेशनल पार्क में सफारी सीजन-2026 को खास बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इको-टूरिज्म को नई दिशा देने के लिए पर्यटन विभाग दुधवा टाइगर रिजर्व में सुविधाओं, डिजिटलीकरण और स्थानीय संस्कृति को जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि आने वाले सीजन में पर्यटकों को पहले से बेहतर, आधुनिक और यादगार अनुभव मिलेगा।
व्याख्या केंद्र होगा आधुनिक, नया रिसेप्शन ब्लॉक बनेगा
दुधवा टाइगर रिजर्व के व्याख्या केंद्र को नए सिरे से विकसित किया जाएगा। मौजूदा कैंप कार्यालय की मरम्मत के साथ एक आकर्षक रिसेप्शन ब्लॉक बनाया जाएगा। इंटरप्रिटेशन सेंटर को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जहां 3-डी म्यूरल, आर्ट पेंटिंग, लाइब्रेरी, मीटिंग हॉल, कैंटीन और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था होगी। दीवारों पर जंगल और वन्य जीवों से जुड़ी 3-डी चित्रकारी की जाएगी, ताकि पर्यटक दुधवा की जैव विविधता और वन्य जीवन को बेहतर तरीके से समझ सकें।

पार्क में सुविधाओं का विस्तार, बैठने से लेकर साइनेज तक सुधार
परियोजना के तहत पार्क में लगी पशु आकृतियों का नवीनीकरण होगा। पर्यटकों के बैठने के लिए गार्डन बेंच, साफ-सफाई के लिए डस्टबिन और बेहतर मार्गदर्शन के लिए नए साइनेज लगाए जाएंगे। पलिया और दुधवा की ओर जाने वाली प्रमुख सड़कों पर भी आधुनिक और आकर्षक साइनेज लगाए जाने की योजना है।
डिजिटलीकरण पर जोर, बुकिंग और जानकारी होगी आसान
दुधवा नेशनल पार्क को पर्यटन के लिहाज से मजबूत बनाने के लिए डिजिटल सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। ऑनलाइन जानकारी और बुकिंग व्यवस्था को और बेहतर किया जाएगा। यूपी पर्यटन और यूपीटीडीबी की वेबसाइट पर दुधवा टाइगर रिजर्व के लिए अलग पेज होगा, जहां होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी।
होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे को मिलेगा बढ़ावा
वेलनेस टूरिज्म को इको-टूरिज्म से जोड़ते हुए जंगल के बीच योग और मेडिटेशन स्पेस विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही क्षेत्र में होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। अब तक 23 होमस्टे, 2 रिसॉर्ट और 5 होटलों का पंजीकरण हो चुका है।
थारू संस्कृति बनेगी दुधवा की पहचान
पर्यटन के साथ स्थानीय थारू संस्कृति को जोड़ने की दिशा में भी ठोस पहल की जा रही है। पर्यटकों को पारंपरिक थारू थाली के साथ मोटे अनाज से बनी श्री अन्न थाली परोसी जाएगी, जिससे स्थानीय खानपान को नई पहचान मिलेगी। होटलों और पर्यटन केंद्रों के माध्यम से थारू शिल्प के उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री सुनिश्चित की जाएगी।
महिला होमस्टे संचालकों और युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
दुधवा क्षेत्र में अधिकांश होमस्टे महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। इन्हें होमस्टे संचालन, डिजिटल भुगतान, मेहमानों से संवाद, स्टोरी टेलिंग और आतिथ्य प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा थारू समाज से जुड़े लोगों को पारंपरिक भोजन, हस्तशिल्प और सत्कार से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। करीब 150 स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड के रूप में तैयार करने की योजना है।
इको-टूरिज्म में बढ़ी भागीदारी, पर्यटकों की संख्या में इजाफा
जयवीर सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच जंगलों, वेटलैंड्स और वन्यजीव क्षेत्रों में 44 इको-टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। इनमें दुधवा, पीलीभीत, रानीपुर और कतर्नियाघाट टाइगर रिजर्व के साथ हैदरपुर, बखिरा, सुर सरोवर, समसपुर और नवाबगंज जैसे वेटलैंड्स शामिल हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की संख्या 2022 में करीब 1.2 लाख थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 2.1 लाख तक पहुंच गई। इनमें से 70 से 85 हजार पर्यटक सफारी का हिस्सा बने।






