लखनऊ, 16 फरवरी 2026:
यूपी में किसानों तक शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाले बीज पहुंचाने के लिए डबल इंजन सरकार ने बड़ी पहल की है। अब बीज के उत्पादन से लेकर किसान तक पहुंचने की पूरी यात्रा डिजिटल तरीके से ट्रैक होगी। इसके लिए प्रदेश सरकार ने सभी बीज व्यवसायियों से अप्रैल से साथी पोर्टल पर अपनी संपूर्ण जानकारी अपडेट करने को कहा है। इस व्यवस्था से बीज वितरण प्रणाली में पारदर्शिता आएगी, नकली और मिलावटी बीज पर लगाम लगेगी और किसानों को भरोसेमंद बीज मिल सकेगा।
इस नई प्रणाली को जमीन पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने व्यापक प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है। लखनऊ स्थित कृषि निदेशालय में दो दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ डॉ. पंकज त्रिपाठी ने किया। प्रशिक्षण में केंद्र सरकार की टीम के साथ महाराष्ट्र कृषि विभाग और एन.आई.सी. के अधिकारियों ने तकनीकी जानकारी साझा की। वरिष्ठ तकनीकी सहायक (सीड) डॉ. सोनू कुमार चौधरी, एनआईसी के वरिष्ठ निदेशक (आईटी) अर्चना और अविनाश विजयकुमार पेडगांवकर, संयुक्त निदेशक निलाद्रि बिहारी मोहंती व उनकी टीम ने पोर्टल के संचालन की बारीकियां समझाईं।

महाराष्ट्र की उप निदेशक (कृषि) डॉ. प्रीति सवाईराम ने अपने राज्य में साथी पोर्टल की सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि कैसे इससे बीज की ट्रेसेबिलिटी मजबूत हुई और किसानों का भरोसा बढ़ा। उन्होंने पोर्टल के विभिन्न चरणों, प्रक्रियाओं और किसानों को होने वाले प्रत्यक्ष लाभों की जानकारी दी।
अपर कृषि निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) अनिल कुमार पाठक ने बताया कि बीज उत्पादक संस्थाओं, कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जा रहा है। ये प्रशिक्षक आगे चलकर जिलों में थोक और खुदरा विक्रेताओं को प्रशिक्षित करेंगे, ताकि अप्रैल से नई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी हो सके। अभी करीब 70 प्रतिशत विक्रेता पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं, शेष 30 प्रतिशत को 15 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी तकनीकी समस्या पर जिला कृषि अधिकारी से समाधान कराया जा सकेगा।
साथी (सीड ऑथेंटिकेशन, ट्रेसेबिलिटी एंड होलिस्टिक इन्वेंटरी) पोर्टल को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने विकसित किया है। इसके तहत हर बीज पैकेट पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर किसान बीज के स्रोत, उत्पादन करने वाली एजेंसी एवं फर्म, प्रमाणीकरण और गुणवत्ता से जुड़ी पूरी जानकारी देख सकेंगे। पहले दिन बीज उत्पादक संस्थाओं, एफपीओ और कंपनियों को प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे दिन जिलों के थोक व रिटेलर विक्रेताओं को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षित प्रतिनिधि अब अपने-अपने जनपदों में इस डिजिटल बदलाव के वाहक बनेंगे जिससे किसानों तक पहुंचे हर बीज पर भरोसे की मुहर हो।






