लखनऊ, 28 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश में जो समुदाय कभी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझते थे, आज वही मुसहर, वनटांगिया, बावरिया और बुक्सा समाज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनकर उभर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने इन वंचित वर्गों को योजनाओं से जोड़कर न केवल आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि उन्हें सम्मानजनक पहचान भी दिलाई है। गांव से लेकर जंगलों तक चल रही यह पहल अब सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन चुकी है।
सरकारी योजनाएं अब लोगों के घर तक
मुख्यमंत्री योगी का मानना है कि प्रदेश का विकास तभी संभव है, जब सबसे कमजोर व्यक्ति मजबूत बने। इसी सोच के तहत इन समुदायों को स्टार्ट अप फंड, रिवाल्विंग फंड और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड से जोड़ा गया है। इससे लोग साहूकारों पर निर्भर हुए बिना खुद का काम शुरू कर पा रहे हैं। सरकार का साफ निर्देश है कि वंचित परिवारों को योजनाओं का लाभ उनके दरवाजे तक मिले।

मुसहर समुदाय में बदली तस्वीर
प्रदेश की 2843 ग्राम पंचायतों में मुसहर समुदाय को संगठित किया गया है। यहां 1896 विशेष मुसहर समूह बनाए गए हैं। स्वयं सहायता समूहों के जरिये इन परिवारों को स्वरोजगार, अनुदान और सरकारी सहायता से जोड़ा गया। इसका असर यह हुआ कि गरीबी और पलायन की समस्या पर रोक लगी और गांवों में स्थायित्व बढ़ा।
वनटांगिया और बुक्सा को मिला नया रास्ता
वन क्षेत्रों में रहने वाले वनटांगिया समुदाय के 496 समूह बनाए गए हैं। इन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने के साथ अब आजीविका के नए अवसर भी मिल रहे हैं। वहीं बुक्सा जनजाति के 548 सदस्यों को समूहों में जोड़कर उनके पारंपरिक कौशल को बाजार से जोड़ा गया है, जिससे उनकी आमदनी में साफ बढ़ोतरी हुई है।
बावरिया परिवारों को मिला सुरक्षा कवच
घुमंतू जीवन जीने वाले बावरिया समुदाय के 2346 परिवारों को पहली बार संगठित किया गया है। इन परिवारों को आवास, आयुष्मान कार्ड, राशन और पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि इन्हें स्थायी रूप से बसाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ा जाए और इन्हें सम्मानजनक जीवन मिले।






