लखनऊ, 25 मार्च 2026:
यूपी में गोशालाओं को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक अहम पहल की है। सीएम योगी के निर्देश पर प्रदेश की चयनित गोशालाओं को अब जर्मन तकनीक से लैस किया जाएगा। इस पहल के तहत उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग और जर्मनी की प्रतिष्ठित संस्था GIZ GmbH के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
आयोग कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता और GIZ GmbH के प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त रूप से इस समझौते को अंतिम रूप दिया। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की गोशालाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना और उनके संचालन को अधिक व्यवस्थित व प्रभावी बनाना है।
समझौते के अनुसार चयनित गोशालाओं को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें क्षमता निर्माण और मानव संसाधन कौशल विकास पर खास जोर रहेगा। प्रशिक्षण के माध्यम से गोशालाओं के प्रबंधन, संसाधनों के बेहतर उपयोग और आधुनिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम किया जाएगा। गोशालाओं का चयन गो सेवा आयोग द्वारा किया जाएगा।
खास बात यह है कि यह समझौता पूरी तरह तकनीकी सहयोग पर आधारित है। इसमें किसी प्रकार की वित्तीय सहायता का प्रावधान नहीं रखा गया है। इसका मुख्य फोकस ज्ञान और कौशल के आदान-प्रदान पर है। इससे गोशालाएं आत्मनिर्भर बन सकें।
श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि इस पहल से गोशालाओं की कार्यक्षमता बढ़ेगी और गो सेवा से जुड़े लोगों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी मिलेगी। योगी सरकार की मंशा है कि गोशालाओं को केवल आश्रय स्थल तक सीमित न रखकर उन्हें एक संगठित और उत्पादक इकाई के रूप में विकसित किया जाए।
इस पहल के तहत गोबर, गोमूत्र और अन्य गो आधारित उत्पादों के वैज्ञानिक व व्यावसायिक उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। यह प्रयास न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बल्कि सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाएगा।






