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नेपाल सीमा से सटे इलाकों में सेहत की दस्तक… गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा पहुंची, शिविर लगे

सीएम योगी बोले-लोकमंगल और जनसेवा की भावना को आगे बढ़ा रही यात्रा, सात जिलों में पहले दिन ही 70 हजार से ज्यादा लोगों को मिला इलाज

लखनऊ, 7 फरवरी 2026

नेपाल सीमा से जुड़े सात जिलों के दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के मकसद से चल रही गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा के तहत बड़े पैमाने पर निशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। नेशनल मेडिकोस ऑर्गेनाइजेशन के अवध और गोरक्ष प्रांत की ओर से, गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास और सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर यह तीन दिवसीय यात्रा 8 फरवरी तक चल रही है।

इस अभियान के तहत सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर और पीलीभीत के थारू बहुल गांवों में एक साथ स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। पहले ही दिन 70 हजार से अधिक लोगों को इलाज, जांच और दवाइयों की सुविधा मिली। वर्ष 2019 से शुरू हुई इस सेवा यात्रा का यह छठा चरण है। इस बार करीब एक हजार चिकित्सक तीन दिनों में तीन लाख से ज्यादा लोगों को स्वास्थ्य परामर्श और उपचार देंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस स्वास्थ्य सेवा यात्रा से जुड़े चिकित्सकों और स्वयंसेवकों को बधाई दी है। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि यह यात्रा लोकमंगल और जनसेवा की भावना से जुड़ी है और भारत-नेपाल सीमा से लगे इलाकों में स्वास्थ्य और सामाजिक चेतना की रोशनी फैला रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महायोगी गुरु गोरखनाथ ने समाज को योग, तप और करुणा का रास्ता दिखाया। उनका स्पष्ट संदेश था कि समाज का हर वर्ग आगे बढ़े और सबका कल्याण हो। उन्होंने बताया कि 2019 से अब तक इस यात्रा के जरिए लाखों लोगों को मुफ्त इलाज, दवाइयां, जांच और स्वास्थ्य जागरूकता का लाभ मिल चुका है। बीते वर्ष फरवरी में आयोजित यात्रा में 2 लाख 18 हजार से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गई थीं।

सीमावर्ती इलाकों में स्वास्थ्य पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती और पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सरकार ने प्राथमिकता दी है। इलाज के साथ-साथ बीमारियों की रोकथाम, जागरूकता और बुनियादी ढांचे पर भी जोर दिया जा रहा है। यह स्वास्थ्य सेवा यात्रा उसी सोच का विस्तार है, जो थारू जनजाति और वनटांगिया समुदाय के बीच भरोसा, सेवा और जागरूकता का काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 के बाद वनटांगिया गांवों को राजस्व गांव का दर्जा देकर उन्हें बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा गया है। इंसेफ्लाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों पर समयबद्ध रणनीति, टीकाकरण और जनभागीदारी से नियंत्रण पाया गया है। सीमावर्ती इलाकों में सुविधाओं का विस्तार और जनजातीय समाज का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

एनएमओ अवध प्रांत के महामंत्री शिवम मिश्र ने बताया कि यात्रा की शुरुआत सात जिलों में एक साथ हुई। पीलीभीत में 10, लखीमपुर में 30, बलरामपुर में 40, श्रावस्ती में 25, बहराइच में 30, सिद्धार्थनगर में 10 और महाराजगंज में करीब 10 स्वास्थ्य शिविर लगाए गए।

इन शिविरों में स्थानीय और बाहर से आए लगभग एक हजार चिकित्सकों ने सेवाएं दीं। लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, मुफ्त दवाइयां बांटी गईं और संतुलित भोजन, माहवारी स्वच्छता जैसे विषयों पर जागरूक किया गया। 7 और 8 फरवरी को भी यह अभियान जारी रहेगा। 8 फरवरी को हर जिले में बड़े स्वास्थ्य मेले आयोजित किए जाएंगे।

इस स्वास्थ्य सेवा यात्रा में नेशनल मेडिकोस ऑर्गेनाइजेशन के साथ एकल अभियान, सीमा जागरण मंच, वनवासी कल्याण आश्रम, विश्व हिंदू परिषद और सेवा भारती जैसे सामाजिक संगठनों का भी सहयोग मिल रहा है।

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