नितिन द्धिवेदी
राजाजीपुरम (लखनऊ), 14 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पारा इलाके में मोहान रोड पर स्थित डा शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय परिसर की बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में खातों से बिना जानकारी लाखों रुपये निकलने का मामला सामने आने के बाद आज हालात तनावपूर्ण हो गए। नाराज उपभोक्ता सुबह बैंक पहुंचे और शाखा प्रबंधक के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उपभोक्ताओं को समझा बुझाकर बैंक के अंदर जाने से रोका, जबकि उपभोक्ता शाखा प्रबंधक को बाहर बुलाकर बातचीत करने की मांग पर अड़े रहे।
विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाले फार्मेसी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर आशुतोष पाठक ने बताया कि उनका सैलरी खाता इसी शाखा में है। उनके खाते से 22 दिसंबर को 5 हजार रुपये, 23 दिसंबर को 48 हजार और 22 हजार रुपये बिना ओटीपी और बिना किसी सूचना के निकाल लिए गए। कुल 75 हजार रुपये निकलने के बाद उन्होंने शाखा प्रबंधक से शिकायत की, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल और पारा थाने में मामला दर्ज कराया। आशुतोष ने बताया कि खाते से पैसे निकलने की जानकारी चार दिन बाद मोबाइल पर मिली, जो बैंक की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

सलेमपुर पतौरा रामपुर निवासी जानकी ने बताया कि उनके खाते में 33 लाख 35 हजार रुपये थे। बैंक प्रबंधक की सलाह पर उन्होंने अपने और पत्नी सरोजनी के नाम से 10-10 लाख रुपये की एफडी कराई थी, जबकि शेष रकम बचत खाते में थी। जब आज वह बैंक पहुंचे तो खाते में केवल 46 हजार रुपये मिले। बैंक कर्मचारी एफडी के कागजों को फर्जी बता रहे हैं, जिससे उपभोक्ता बेहद परेशान और असहाय नजर आए।
मध्य प्रदेश निवासी किरण ने बताया कि वह अपने पति के साथ बुद्धेश्वर भपटामऊ में किराये पर रहकर मजदूरी करती हैं। बच्चों के भविष्य के लिए उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता खुलवाया था। उन्होंने 18 दिसंबर को 5 हजार, 22 दिसंबर को 5 हजार, 29 दिसंबर को 5 हजार और 9 जनवरी 2026 को 20 हजार रुपये बैंक में जमा किए थे। अब खाते में सिर्फ 5 हजार रुपये बचे हैं। पूछने पर बैंक कर्मचारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं।
खातों से रुपये गायब होने की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में उपभोक्ता बैंक पहुंचे। जब बैंक कर्मियों ने सही जानकारी नहीं दी तो उपभोक्ताओं ने बैंक के बाहर हंगामा शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने दस उपभोक्ताओं को अंदर वार्ता के लिए बुलाने की बात कही, लेकिन उपभोक्ता शाखा प्रबंधक को बाहर बुलाकर बातचीत कराने की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान कई उपभोक्ता रोते नजर आए और पुलिस लोगों को लगातार समझाने का प्रयास करती रही।

मामले में कई अन्य खाताधारकों के नाम भी सामने आए हैं। ममता के खाते से 1 लाख 16 हजार, नीलू से 31 हजार, नूरजहां से ढाई लाख, राधा रावत से 50 हजार, मुन्ना पाल से 25 हजार, सालिक रामपाल से 17 लाख 30 हजार, शिवानी यादव से 47 हजार, अवधेश से 4 लाख, रितु यादव से 3 लाख, हरिशंकर से 3 लाख, राम से 2 लाख, फूलचंद कश्यप से 5 लाख, सोनी यादव से 9 हजार, प्रीती से 500 रुपये, समीत कुमार की एफडी और खाते से करीब 2 लाख 54 हजार, रामसिंह यादव से 10 लाख, अंजली से 85 हजार, अमित से 30 हजार, अंशी की 3 लाख की एफडी, रूचि गौतम की 6 लाख की एफडी, पम्मी की 2 लाख की एफडी और रितेश से 64 हजार रुपये गायब होने की बात सामने आई है।






