लखनऊ, 14 फरवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ से बैंकिंग सेक्टर में बड़ी खबर है। शहर के इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक का बैंकिंग लाइसेंस भारतीय रिजर्व बैंक ने तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक किसी भी प्रकार का बैंकिंग कारोबार नहीं कर सकेगा। जमा स्वीकार करने, राशि लौटाने या अन्य लेनदेन रोक दिए गए हैं।
आरबीआई के मुताबिक बैंक की आय अर्जित करने की संभावनाएं बेहद कमजोर हो चुकी थीं। वह बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 22(3) के आवश्यक प्रावधानों का पालन करने में विफल रहा। आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक का संचालन जारी रहना जमाकर्ताओं के हितों के प्रतिकूल होता और व्यापक जनहित प्रभावित होता। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश के सहकारिता आयुक्त एवं निबंधक से बैंक को परिसमापन में भेजने और परिसमापक नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है।

परिसमापन की स्थिति में जमाकर्ताओं को राहत भी है। डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (डीआईसीजीसी) के तहत हर जमाकर्ता को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की जमा बीमा राशि मिलने का अधिकार है। बैंक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 98.75 प्रतिशत जमाकर्ताओं की पूरी जमा राशि बीमा सीमा के भीतर कवर हो जाएगी। इसके अलावा 31 दिसंबर 2025 तक डीआईसीजीसी ने जमाकर्ताओं की सहमति के आधार पर कुल बीमित जमा में से 2.90 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में कमजोर वित्तीय स्थिति वाले सहकारी बैंकों पर आरबीआई की सख्ती बढ़ी है जिससे जमाकर्ताओं के पैसे सुरक्षित रहें और सिस्टम में भरोसा बना रहे। प्रभावित जमाकर्ताओं को सलाह दी गई है कि वे परिसमापक की घोषणा और डीआईसीजीसी की प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक अपडेट पर नजर रखें जिससे दावा समय पर दर्ज कराया जा सके।






