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‘ग्रीन’ हवाई अड्डे की सूरत ले रहा जेवर एयरपोर्ट… सोलर एनर्जी व इलेक्ट्रिक गाड़ियों से होगा लैस

ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से नेट-ज़ीरो कॉन्सेप्ट पर हो रहा विकसित, मिल चुका है भारत के पहले IGBC ग्रीन कैंपस सर्टिफाइड एयरपोर्ट का दर्जा

लखनऊ/ग्रेटर नोएडा, 13 जनवरी 2026:

उत्तर प्रदेश में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट सिर्फ हवाई सफर का नया केंद्र नहीं होगा, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी देश के सबसे बेहतर एयरपोर्ट्स में शामिल होगा। योगी सरकार की पहल पर इसे पूरी तरह ग्रीन और टिकाऊ मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। यह एयरपोर्ट ज़्यूरिख एयरपोर्ट ग्रुप के सहयोग से नेट-ज़ीरो कॉन्सेप्ट पर विकसित हो रहा है। इसे भारत का पहला IGBC ग्रीन कैंपस सर्टिफाइड एयरपोर्ट बनने का दर्जा भी मिल चुका है।

कम ऊर्जा, कम पानी, कम कचरा

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के एसीईओ शैलेन्द्र कुमार भाटिया ने बताया कि टर्मिनल भवन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि बिजली, पानी और कचरे की खपत कम से कम हो। एयरपोर्ट की पार्किंग के 20 फीसदी हिस्से में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए फास्ट और स्टैंडर्ड चार्जिंग की सुविधा दी जा रही है। एयरसाइड पर चलने वाले सभी वाहन पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगे। इनके लिए कई जगह चार्जिंग प्वाइंट बनाए जा रहे हैं।

82.94 एकड़ में सोलर फार्म

एयरपोर्ट परिसर में 82.94 एकड़ में सोलर फार्म लगाया जा रहा है। इससे 51,966 मेगावाट-घंटा नवीकरणीय ऊर्जा तैयार होगी। इससे एयरपोर्ट को बड़ी मात्रा में ग्रीन बिजली मिलेगी। दो जगह रेनवाटर हार्वेस्टिंग पौंड बनाए जा रहे हैं, जिससे बारिश का पानी जमा कर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

ग्रीन फ्यूल और कचरा प्रबंधन

एयरपोर्ट में आरएनजी प्लांट लगाने की भी तैयारी है। इससे एयरपोर्ट वाहन, डीजी सेट और दूसरी प्रणालियां ग्रीन फ्यूल से चलेंगी। कचरे के सही निपटारे के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली लागू की जाएगी, जिसमें कचरे की छंटाई, रीसाइक्लिंग और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा।

हर महीने होगी पर्यावरण की निगरानी

पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक मॉनिटरिंग प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत हर महीने हवा, पानी, मिट्टी, सीवेज और कचरे की गुणवत्ता की जांच होगी। जेवर एयरपोर्ट शुरू होने के बाद न सिर्फ निवेश और रोजगार के नए मौके पैदा होंगे, बल्कि उत्तर प्रदेश का ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत होगा।

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