लखनऊ, 2 जनवरी 2026:
नया साल अंजना के लिए उम्मीद और राहत लेकर आया। दबंगों की प्रताड़ना झेल रहीं एक मेजर की बीमार बेटी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर महज 24 घंटे के भीतर उसका मकान वापस दिला दिया गया। इंदिरानगर स्थित करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा करने वाले भूमाफिया सलाखों के पीछे पहुंचा तो अंजना की आंखों से बरसों का दर्द आंसुओं में बह निकला।
सेना में मेजर रहे स्वर्गीय बिपिन चंद्र भट्ट की बेटी अंजना, पिता और भाई बहन को खोने के बाद लंबे समय से सिजोफ्रेनिया से जूझ रही हैं। इलाज के लिए वह रिहैब सेंटर में रह रही थीं। इसी दौरान चंदौली के बलवंत कुमार यादव और उसके साथी मनोज कुमार यादव ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर इंदिरानगर स्थित उनके मकान पर कब्जा जमा लिया और अपना बोर्ड तक लगा दिया।

मेजर की बेटी की पीड़ा सीएम तक पहुंची
31 दिसंबर की शाम अंजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलीं। उन्होंने कांपती आवाज में अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि किस तरह बीमारी का फायदा उठाकर उनकी पुश्तैनी संपत्ति हड़प ली गई। मुख्यमंत्री ने पूरी बात ध्यान से सुनी और भरोसा दिलाया कि देर नहीं होगी। मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस हरकत में आई। दस्तावेजों की जांच हुई, सच्चाई सामने आई और गुरुवार दोपहर से पहले अंजना को उनका घर वापस दिला दिया गया।
घर में कदम रखते ही छलक पड़े आंसू
जब अंजना अपने घर पहुंचीं तो माहौल भावुक हो गया। वह हर कमरे में गईं, दीवारों को छूकर पुरानी यादों में खो गईं। बाहर आकर उन्होंने दीप जलाया, नारियल फोड़ा और पड़ोस की महिलाओं से लिपटकर रो पड़ीं। उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे और जुबान पर बस एक ही बात थी, योगी अंकल ने हमें सहारा दिया।

24 घंटे में कार्रवाई, दो आरोपी गिरफ्तार
एसीपी गाजीपुर अनिंद्य विक्रम सिंह ने बताया कि मामले में बलवंत कुमार यादव उर्फ बब्लू और मनोज कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों ने फर्जी कागजात के सहारे संपत्ति अपने नाम कराने की कोशिश की थी। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई कर न सिर्फ कब्जा हटवाया बल्कि आरोपियों को जेल भेज दिया।
सीएम ने भरोसे को जिंदा रखा
रिहैब सेंटर के डॉक्टर संतोष दुबे ने बताया कि अंजना कई साल से इलाज करा रही हैं। घर पर कब्जे की खबर ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद जो तेजी से कार्रवाई हुई, उसने भरोसा जगा दिया कि इंसाफ अभी जिंदा है। बात सिर्फ एक मकान की नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो एक बीमार बेटी ने सरकार पर किया।






