लखनऊ, 14 जनवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल टल गई है। शासन और केजीएमयू प्रशासन के बीच हुई वार्ता के बाद सभी संगठनों ने कार्य बहिष्कार न करने का निर्णय लिया है। शासन ने 9 जनवरी को हुई घटना के संबंध में केजीएमयू प्रशासन से अतिरिक्त सबूत मांगे हैं। इसके बाद स्थिति पर फिलहाल विराम लग गया है।
मालूम हो कि 9 जनवरी को केजीएमयू परिसर में उस समय तनाव की स्थिति बन गई थी जब राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव वहां पहुंचीं। धर्मांतरण के प्रयासों के आरोप को लेकर उनके आगमन के दौरान कुलपति कार्यालय पर जमकर हंगामा हुआ। इस दौरान अपर्णा यादव के समर्थकों और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा नारेबाजी और तोड़फोड़ की गई। घटना के बाद केजीएमयू प्रशासन की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई लेकिन एफआईआर दर्ज न होने से विश्वविद्यालय के डॉक्टरों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया।
इसी के चलते केजीएमयू शिक्षक संघ, कर्मचारी संघ, नर्सिंग एसोसिएशन, रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन और एससी-एसटी कार्मिक संगठन ने मंगलवार से हड़ताल का एलान किया था। हालांकि कुलपति के अनुरोध पर पहले इसे एक दिन के लिए टाला गया। इस बीच शासन स्तर पर मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन से और ठोस साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा गया है।
सूत्रों के अनुसार महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने मुख्यमंत्री को यह जानकारी दी है कि वह 9 जनवरी को केजीएमयू अकेले पहुंची थीं। वहीं, केजीएमयू प्रशासन द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर में उनके साथ आए समर्थकों द्वारा हंगामा और प्रदर्शन किए जाने का उल्लेख है। इसी विरोधाभास को स्पष्ट करने के लिए शासन ने सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग समेत अन्य सबूत मांगे हैं जिन्हें केजीएमयू प्रशासन ने भेज दिया है।
केजीएमयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. केके सिंह के मुताबिक विश्वविद्यालय के सभी डॉक्टर और कर्मचारी अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। उनका कहना है कि 9 जनवरी की घटना को लेकर कुलपति की मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव (गृह) से बातचीत हुई है। दोनों अधिकारियों ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
प्रो. सिंह ने कहा कि आश्वासन और मरीजों के हित को ध्यान में रखते हुए फिलहाल कार्य बहिष्कार का निर्णय स्थगित किया गया है। यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आगे आंदोलन की रणनीति पर पुनर्विचार किया जाएगा।






