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खामेनेई की गुप्त बैठक बनी आखिरी मुलाकात… ईरान में नेतृत्व संकट की आशंका, उत्तराधिकारी की रेस शुरू

अगले 24 घंटे तय करेंगे जंग या संवाद, 1989 में सत्ता संभालने के बाद से खामेनेई के पास था ईरान में सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नियंत्रण, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी से मध्य पूर्व में बढ़ सकता है तनाव

न्यूज डेस्क, 1 मार्च 2026:

इजराइली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 86 वर्षीय खामेनेई इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमले में मारे गए। यह हमला उस समय किया गया जब वे एक सुरक्षित स्थान पर बैठक कर रहे थे। उन्हें उनके दो करीबी सहयोगियों सैन्य सलाहकार और वरिष्ठ कमांडर के साथ बैठक के दौरान निशाना बनाया गया था।

ईरानी मीडिया ने खामेनेई की मौत की पुष्टि करते हुए 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है, वहीं देश भर में सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किये गए हैं। इजराइल और अमेरिका ने इस संयुक्त अभियान को इतिहास की सबसे व्यापक सैन्य कार्रवाई बताया जिसमें ईरान के सैन्य ढांचे और नेतृत्व को निशाना बनाया गया।

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वर्ष 1989 में सत्ता संभालने के बाद से खामेनेई ने ईरान में सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नियंत्रण अपने पास रखा था। सेना की कमान, बड़े अधिकारियों की नियुक्ति और नीतिगत निर्णयों पर उनकी अंतिम अधिकारिता थी। उनके नेतृत्व ने क्षेत्रीय तनाव, परमाणु कार्यक्रम विवाद और इस्लामी क्रांति के वर्षों भर संघर्षों को आकार दिया।

हमले के तुरंत बाद जगह को सील कर दिया गया और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि खामेनेई के अलावा कुछ वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों समेत कई की मौत हुई है। कुछ शुरुआती जानकारियों के अनुसार उनकी पुत्री और पोते के भी हताहत होने की खबरें सामने आई हैं।

मृत्यु की खबर के बाद ईरान के अंदर गहरा शोक और गुस्सा छा गया है। भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतर कर राष्ट्रीय एकता और प्रतिशोध की मांग कर रहे हैं। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। इससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है।

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खामेनेई की मौत के बाद ईरान में जल्द ही उत्तराधिकारी की घोषणा को लेकर संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। असेंबली ऑफ लीडरशिप एक्सपर्ट्स जल्द ही नया सुप्रीम लीडर चुनने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। इस बीच देश में सत्ता के एक बड़े बदलाव और संभावित नेतृत्व संकट की आशंका जताई जा रही है।

इस ऐतिहासिक मोड़ से न सिर्फ ईरान की आंतरिक राजनीति बल्कि पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा, तेल बाजार और वैश्विक कूटनीति पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है। सैन्य संघर्ष और कूटनीति के बीच अब दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिक गई हैं।

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