लखनऊ, 16 फरवरी 2026:
यूपी में महिला सशक्तीकरण अब सिर्फ नारा नहीं अपितु जमीनी हकीकत बन चुका है। बीते नौ वर्षों में प्रदेश सरकार की योजनाओं ने गांव-गांव तक आर्थिक आत्मनिर्भरता की अलख जगाई है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 33 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने की राह पर हैं और हजारों परिवारों की आर्थिक तस्वीर बदल रही हैं।
प्रदेश के आजमगढ़ जिले की हुस्नआरा खातून इसकी सशक्त मिसाल हैं। तैबा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने रेशमी साड़ियों के निर्माण का काम शुरू किया। ‘लखपति दीदी योजना’ के तहत मिली 1.15 लाख रुपये की सहायता ने उनके सपनों को रफ्तार दी। आज उनका कारोबार बारह गुना तक बढ़ चुका है। वे हर महीने लगभग एक लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं। उनके परिवार को अब सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का नया सहारा मिला है।
इसी जिले की शशिकला राजभर ने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर ‘अदिति फास्ट फूड’ नाम से स्टॉल शुरू किया। जहां पहले वे रोजगार की तलाश में भटक रही थीं वहीं आज रोजाना करीब दो हजार रुपये का कारोबार कर दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। ये कहानियां बताती हैं कि सही दिशा और निगरानी के साथ लागू योजनाएं समाज की संरचना तक बदल सकती हैं।
महिला सशक्तीकरण की इस यात्रा में वित्तीय समावेशन ने भी अहम भूमिका निभाई है। बीसी सखी के रूप में कार्य कर रहीं सरोज मौर्या गांवों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचा रही हैं। अब महिलाएं घर के पास ही जमा-निकासी, पेंशन वितरण और डिजिटल भुगतान कर पा रही हैं। प्रदेश में बीसी सखियों के जरिए अब तक लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का लेन-देन और 107 करोड़ रुपये से अधिक का लाभांश दर्ज हुआ है।
प्रदेश में नौ लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह, 63,519 ग्राम संगठन और 3,272 संकुल स्तरीय संघ सक्रिय हैं। इनसे 99 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं। ‘लखपति महिला योजना’ के तहत 18 लाख से अधिक महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। आसान, ब्याज मुक्त और चरणबद्ध पूंजी उपलब्ध कराने वाली यह पहल न केवल रोजगार सृजित कर रही है बल्कि महिलाओं को आर्थिक फैसलों की धुरी भी बना रही है।






