लखनऊ, 6 जनवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को वामपंथी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिर्जापुर में पार्टी पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। सीपीआई (एमएल) के नेतृत्व में परिवर्तन चौक से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला गया। इसमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा (माले) लिबरेशन और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के कार्यकर्ता शामिल हुए। मार्च के बाद प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने यूपी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मिर्जापुर में पार्टी के दो नेताओं सुधाकर यादव और जीरा भारती को फर्जी मामलों में गिरफ्तार किया गया है। नेताओं का कहना था कि पुलिस ने बिना किसी वारंट और गिरफ्तारी का कारण बताए दोनों को हिरासत में लिया। आरोप है कि दोनों नेताओं को पार्टी के एक सदस्य की अंत्येष्टि से लौटते समय मिर्जापुर जिले के अदलहाट थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।

वामपंथी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के बाद लंबे समय तक यह जानकारी नहीं दी गई कि दोनों नेताओं को कहां ले जाया गया है। इसे उन्होंने न केवल कानून का उल्लंघन बल्कि राजनीतिक उत्पीड़न का हिस्सा बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राज्य में असहमति की आवाजों को दबाने के लिए पुलिस और प्रशासन का दुरुपयोग किया जा रहा है।
मार्च में शामिल नेताओं ने यूपी सरकार की नीतियों पर भी तीखा हमला बोला। उनका आरोप था कि सरकार का बुलडोजर एक्शन गरीबों, किसानों, आदिवासियों और शोषित वर्गों के खिलाफ चल रहा है। महिला नेताओं ने राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
प्रदर्शन के दौरान वामपंथी नेताओं ने मिर्जापुर के लालगंज क्षेत्र के तेंदुआ खुर्द गांव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन वर्षों से रह रहे गरीब आदिवासी परिवारों को जबरन बेदखल करने की कोशिश कर रहा है। इस मुद्दे को लेकर पहले तहसील स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया गया था लेकिन विरोध के बावजूद प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई को अंजाम दिया।
वामपंथी दलों ने इस पूरी कार्रवाई पर गहरा रोष जताते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना के खिलाफ ऐसे कदम बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। ज्ञापन में मांग की गई कि मिर्जापुर मामले की निष्पक्ष जांच हो गिरफ्तार नेताओं को तत्काल रिहा किया जाए और गरीबों व आदिवासियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।






