लखनऊ, 12 फरवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में जनसुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्त और सराहनीय पहल की है। गुरुवार को चौक कोतवाली परिसर में पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) विश्वजीत श्रीवास्तव की अगुवाई में आयोजित बैठक में धारदार एवं प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से हो रही दुर्घटनाओं पर गंभीर मंथन किया गया। बैठक का उद्देश्य पतंगबाजी के दौरान आम नागरिकों, दोपहिया वाहन चालकों और पक्षियों की जान को खतरे में डालने वाले खतरनाक मांझे पर प्रभावी रोक लगाना था।
बैठक के दौरान डीसीपी ने पतंग उड़ाने वालों और पतंग विक्रेताओं को सामूहिक रूप से शपथ दिलाई कि वे आज से किसी भी प्रकार के धारदार अथवा प्रतिबंधित मांझे का प्रयोग नहीं करेंगे और न ही इसके क्रय-विक्रय में संलिप्त होंगे। इस पहल को समर्थन देते हुए अनेक पतंग प्रेमियों ने स्वेच्छा से अपने पास मौजूद प्रतिबंधित मांझे को पुलिस प्रशासन के समक्ष जमा कराया। यह दृश्य जनसुरक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और जिम्मेदार नागरिकता का उदाहरण बना।

डीसीपी ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित मांझे का उपयोग न केवल गैरकानूनी है बल्कि यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। पूर्व में ऐसे कई हादसे हो चुके हैं जिनमें राहगीरों की गर्दन कटने, दोपहिया वाहन चालकों के घायल होने और पक्षियों के गंभीर रूप से जख्मी होने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि शासन के निर्देशानुसार प्रतिबंधित मांझे के भंडारण, बिक्री और उपयोग पर कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है, और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने कहा कि मनोरंजन तभी सार्थक है जब वह दूसरों की सुरक्षा को खतरे में न डाले। उन्होंने सभी व्यापारियों और पतंग प्रेमियों से प्रतिबंधित मांझे के पूर्ण बहिष्कार की अपील की। पार्षद एवं व्यापार मंडल के महामंत्री अनुराग मिश्र ने किया कि इस जागरूकता संदेश को व्यापक स्तर पर फैलाएं और केवल सुरक्षित व साधारण धागे का ही उपयोग करें।
बैठक में सीओ चौक, सीओ बाजारखाला, पतंग एसोसिएशन के पदाधिकारी, सामाजिक संगठनों और क्लबों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस अभियान को जनआंदोलन का रूप देने का संकेत दिया। यह पहल लखनऊ को सुरक्षित पतंगबाजी की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।






