लखनऊ, 3 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की गोमती नदी में वाटर मेट्रो शुरू करने के प्रस्ताव को लेकर सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए तेज कदम बढ़ाए हैं। इसी कड़ी में परिवहन राज्य मंत्री दयाशंकर सिंह के सरकारी आवास 9, कालीदास मार्ग पर एक अहम बैठक हुई, जिसमें कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड के निदेशक संजय कुमार मौजूद रहे। बैठक के दौरान गोमती नदी में जल परिवहन शुरू करने की संभावनाओं पर विस्तार से मंथन किया गया।
इस बैठक के दौरान कोच्चि मेट्रो के निदेशक ने गोमती नदी में वाटर मेट्रो संचालन को लेकर तैयार की गई तकनीकी व्यवहारिकता रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि गोमती नदी में जल परिवहन की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं और सुनियोजित तरीके से इस परियोजना को सफल बनाया जा सकता है। मंत्री ने रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी ली।

परिवहन मंत्री के अनुसार प्रदेश में जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए कई स्थानों पर काम किया जा रहा है। लखनऊ की गोमती नदी के अलावा मथुरा में यमुना नदी पर आगरा से मथुरा तक, गोरखपुर के रामगढ़ ताल, बलिया के सुरहा ताल और गंगा नदी में भी वाटर मेट्रो और जल परिवहन परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
मंत्री के मुताबिक परियोजना के तहत सबसे पहले नेविगेशन से जुड़ी सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। इसके बाद इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, पैसेंजर काउंटिंग सिस्टम, पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव अध्ययन, टर्मिनल और जेट्टी निर्माण, रोड कनेक्टिविटी, पॉन्टून, ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम, इलेक्ट्रिकल ढांचा, बोट चार्जिंग, फायर सुरक्षा और एचवीएसी जैसे बिंदुओं पर अध्ययन किया जाएगा। इन सभी के आधार पर डीपीआर तैयार होगी और फिर लागत तय कर निविदाएं जारी की जाएंगी।
परिवहन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़ी सभी औपचारिकताओं में तेजी लाई जाए। उन्होंने परियोजना पर आने वाले कुल खर्च का विस्तृत ब्यौरा जल्द उपलब्ध कराने को कहा, ताकि समय पर बजट आवंटन किया जा सके। मंत्री ने कहा कि वाटर मेट्रो से लखनऊ को नई पहचान मिलेगी और आम लोगों को यात्रा के साथ मनोरंजन का भी नया विकल्प मिलेगा।






