प्रयागराज, 6 जनवरी 2026:
आस्था के पर्व माघ मेले के दौरान प्रयाग की प्राचीन पंचकोसी परिक्रमा की शुरुआत हो गई। संगम तट पर गंगा पूजन के साथ साधु-संतों के जत्थे ने पांच दिनों तक चलने वाली इस परिक्रमा का शुभारंभ किया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और पंच दशनाम जूना अखाड़ा के नेतृत्व में परिक्रमा यात्रा निकाली गई।
पूजन के बाद साधु-संत अक्षयवट और आदि शंकर विमान मंडपम मंदिर पहुंचे। सोमवार को पहले दिन की यात्रा यहीं संपन्न हुई। माघ मेला प्रशासन को परिक्रमा के दौरान यातायात और सुरक्षा व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परिक्रमा के अंतिम दिन साधु-संतों के लिए भंडारे का आयोजन होगा।
क्यों खास है पंचकोसी परिक्रमा
पंचकोसी परिक्रमा प्रयाग की पुरानी धार्मिक परंपरा मानी जाती है। अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि के अनुसार, प्रयाग मंडल का विस्तार पांच योजन और बीस कोस तक माना गया है। गंगा, यमुना और सरस्वती के छह तटों को मिलाकर तीन अंतर्वेदियां अंतर्वेदी, मध्य वेदी और बहिर्वेदी बनाईं गईं हैं। thehohalla news
इन क्षेत्रों में स्थित तीर्थ, उपतीर्थ, आश्रम और मंदिरों की परिक्रमा ही पंचकोसी परिक्रमा कहलाती है। मान्यता है कि इस यात्रा से श्रद्धालुओं को सभी देवी-देवताओं और तीर्थ स्थलों के दर्शन का पुण्य फल मिलता है।
556 साल पहले अकबर के शासन में लगी थी रोक
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी के मुताबिक, पंचकोसी परिक्रमा कभी माघ मेले का अहम हिस्सा हुआ करती थी। करीब 556 साल पहले मुगल शासक अकबर के दौर में इस परंपरा पर रोक लगा दी गई थी। लंबे समय बाद साधु-संतों की मांग और सरकार की पहल पर वर्ष 2019 में पंचकोसी परिक्रमा दोबारा शुरू हुई। तब से यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है और माघ मेले की रौनक बढ़ा रही है।






