लखनऊ, 20 जनवरी 2026:
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया एवं यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने संसद और राज्य विधानमंडलों की घटती कार्यवाही को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मंगलवार को किए गए एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि लगातार हंगामे, स्थगन और सत्रों के कम होते समय के कारण संसद व विधानमंडलों की जन उपयोगिता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
मायावती ने यूपी की राजधानी लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन दिवसीय सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मंच से विधानमंडलों की कार्यवाही के लगातार घटते समय पर चिंता व्यक्त किया जाना न केवल उचित बल्कि समयानुकूल और सराहनीय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों को इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए इस पर अमल सुनिश्चित करना चाहिए।
देश में संसद व राज्य विधानमण्डलों के सत्र के घटते समय के साथ-साथ हर बार इनके भारी हंगामेदार एवं स्थगन आदि से इनकी जन उपयोगिता का घटता प्रभाव अक्सर गंभीर चिन्ता का विषय रहा है और इसीलिये उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के…
— Mayawati (@Mayawati) January 20, 2026
बसपा प्रमुख ने कहा कि भारतीय संसद और राज्यों के विधानमंडल देश की संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं। ये संस्थाएं सरकार और कार्यपालिका को जनहित और देशहित के प्रति जवाबदेह बनाए रखने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि संसद और विधानमंडलों की कार्यवाही साल में कम से कम 100 दिनों के निर्धारित कैलेंडर के अनुसार नियमों के तहत और शांतिपूर्ण वातावरण में चलनी चाहिए।
अपने बयान में मायावती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के उस हालिया फैसले का भी स्वागत किया जिसमें कहा गया है कि सरकारी मान्यता न होना किसी मदरसे को बंद करने का आधार नहीं हो सकता। इसी के तहत श्रावस्ती में एक मदरसे पर लगी सील 24 घंटे के भीतर हटाने के निर्देश को उन्होंने महत्वपूर्ण और सामयिक बताया।
उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी घटनाएं किसी नीतिगत निर्णय के बजाय जिला स्तर के अधिकारियों की मनमानी का परिणाम हो सकती हैं। मायावती ने राज्य सरकार से अपील की कि वह इस पर संज्ञान लेकर ऐसी प्रवृत्तियों पर सख्ती से रोक लगाए जिससे अनावश्यक विवाद और सामाजिक तनाव से बचा जा सके।






