बिजनेस डेस्क, 9 मार्च 2026:
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। सोमवार को कारोबार की शुरुआत होते ही बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक बुरी तरह लुढ़क गए। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी बिखरते नजर आए। इससे निवेशकों में हड़कंप मच गया।
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स 1,862 अंकों की गिरावट के साथ 77,056.75 के स्तर पर खुला। हालांकि गिरावट यहीं नहीं थमी और कुछ ही देर में यह 2,345.89 अंक टूटकर 76,573.01 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। इसी तरह निफ्टी 50 भी 583 अंकों की कमजोरी के साथ 23,868.05 पर खुला और थोड़ी ही देर में 711.25 अंक लुढ़ककर 23,739.20 के स्तर तक फिसल गया।
विश्लेषकों के मुताबिक पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों में आई गिरावट का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा है। बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए बड़े पैमाने पर बिकवाली की।

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो सुबह करीब 11 बजे सभी सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में दर्ज की गई जो करीब 5.11 प्रतिशत टूट गया। इसके अलावा निफ्टी ऑटो इंडेक्स में लगभग 4.5 प्रतिशत की गिरावट रही। बैंक निफ्टी 3.56 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 3.12 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे थे। अन्य सेक्टोरल इंडेक्स भी लगभग 1.5 से 2 प्रतिशत की गिरावट के साथ ट्रेड करते दिखे।
निफ्टी 50 पैक में लगभग सभी शेयर दबाव में रहे। केवल एचसीएल टेक और विप्रो ही हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। एचसीएल टेक के शेयर करीब 0.46 प्रतिशत और विप्रो 0.41 प्रतिशत की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे।
सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में इंडिगो करीब 5.96 प्रतिशत टूट गया। भारतीय स्टेट बैंक के शेयरों में 5.38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा श्रीराम फाइनेंस, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में भी भारी दबाव देखने को मिला।
बाजार में इस तेज गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटल करीब 15 लाख करोड़ रुपये घटकर 450 लाख करोड़ रुपये से गिरकर लगभग 435 लाख करोड़ रुपये रह गया। बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका जताई जा रही है।






