अयोध्या, 30 नवंबर 2025:
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद परिवार के साथ रामलला मंदिर पहुंचे और दर्शन-पूजन किया। बाहर निकलने के बाद उन्होंने कहा कि राम मंदिर ध्वजारोहण समारोह में उन्हें आमंत्रण न मिलना दुखद है, लेकिन रामलला के दर्शन के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं होती।
25 नवंबर को राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया गया था। सांसद अवधेश प्रसाद का कहना है कि उन्हें इस कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि संसदीय प्रोटोकॉल के अनुसार प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में स्थानीय सांसद को निमंत्रण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि समारोह के बाद वह नंगे पैर मंदिर पहुंचकर दर्शन करने की अपनी बात पर अडिग थे, और शनिवार को परिवार के साथ दर्शन करने का सौभाग्य मिला।
सांसद अपने बेटे अमित प्रसाद, बहू भाग्यश्री, बेटी डॉ. अलका, पोते अधीश और निजी सचिव शशांक शुक्ल सहित परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रामलला के चरणों में मत्था टेकने पहुंचे। उन्होंने कहा कि वह रामलला की जन्मभूमि पर जन्म लेने को अपना सौभाग्य मानते हैं और प्रभु की कृपा से नौ बार जनता ने उन्हें जनप्रतिनिधि चुना।
अवधेश प्रसाद ने कहा कि मंदिर भाजपा ने नहीं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर बना है और अभी इसके पूर्ण होने में लगभग एक वर्ष का समय लगेगा। उन्होंने कहा कि ध्वजारोहण कार्यक्रम में उन्हें नजरअंदाज किए जाने का कारण समझ से परे है, लेकिन प्रभु के दर्शन के लिए किसी की अनुमति नहीं लेनी पड़ती, जब हरि इच्छा होती है, वह स्वयं बुला लेते हैं।
सांसद ने 25 नवंबर को आरोप लगाया था कि उन्हें राम मंदिर में हुए धर्म ध्वजा स्थापना समारोह में इसलिए नहीं बुलाया गया क्योंकि वह दलित समाज से आते हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा था कि यह राम की मर्यादा नहीं, बल्कि संकीर्ण सोच का परिचय है। उन्होंने कहा था कि राम सबके हैं, उनकी लड़ाई किसी निमंत्रण की नहीं, बल्कि सम्मान, बराबरी और संविधान की मर्यादा की है।






