लखनऊ, 11 जनवरी 2026:
यूपी में गंगा, यमुना सहित प्रमुख नदियों की स्वच्छता और संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है। पीएम मोदी के मार्गदर्शन और सीएम योगी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा अपशिष्ट जल शोधन को लेकर व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। नमामि गंगे मिशन फेज-2 के अंतर्गत प्रदेश के शहरी क्षेत्रों से निकलने वाला गंदा पानी अब बिना शोधन के नदियों में प्रवाहित नहीं होगा।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में चार बड़ी सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू किया गया है। इससे नदी प्रदूषण की रोकथाम को मजबूती मिली है। आगरा में 31 एमएलडी और 35 एमएलडी क्षमता के दो आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) शुरू किए गए हैं। 842 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना से लगभग 25 लाख लोगों को लाभ होगा और यमुना के प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी।

वाराणसी के अस्सी-बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का संचालन शुरू किया गया है। 308 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना से 18 लाख से अधिक लोगों को स्वच्छता और बेहतर अपशिष्ट जल प्रबंधन की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा उन्नाव के शुक्लागंज में 65 करोड़ रुपये की लागत से 5 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्रारंभ किया गया है। इससे करीब 3 लाख लोगों को लाभ होगा और गंगा में गिरने वाले प्रदूषित नालों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक जोगिन्दर सिंह ने बताया कि प्रदेश में 74 सीवर शोधन परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 41 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। शेष पर तेजी से काम जारी है। वर्तमान में प्रदेश में 152 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं। ये प्रतिदिन बड़ी मात्रा में सीवेज को वैज्ञानिक तरीके से शुद्ध कर पर्यावरण के अनुकूल बना रहे हैं।

प्रयागराज, कानपुर, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, लखनऊ, मेरठ, गोरखपुर, आगरा, वाराणसी सहित प्रदेश के दर्जनों शहरों और कस्बों में सीवर शोधन परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन प्रयासों से न केवल गंगा-यमुना की स्वच्छता सुनिश्चित हो रही है, बल्कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल रही है। सीएम योगी के नेतृत्व में नदी संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर किए जा रहे इन अभूतपूर्व प्रयासों से उत्तर प्रदेश गंगा स्वच्छता के राष्ट्रीय लक्ष्य को तेजी से हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।






