लखनऊ, 26 नवंबर 2025 :
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के साइबर थाना क्राइम टीम ने नीट और अन्य कोर्स में एडमिशन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने अलग-अलग राज्यों में अपनी पहचान बदलकर कंसल्टेंसी खोलकर ठगी की। और लखनऊ में भी करोड़ों रुपए की ठगी कर ऑफिस बंद करके फरार हो गए थे।
आरोपियों ने अब तक लगभग 100 करोड़ रुपए की ठगी की है। डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान औरंगाबाद (बिहार) निवासी अभिनव शर्मा और समस्तीपुर (बिहार) निवासी संतोष कुमार के रूप में हुई है। अभिनव शर्मा बीटेक मैकेनिकल पास है, जबकि संतोष 12वीं पास है। आरोपियों ने एमबीबीएस, इंजीनियरिंग, बी फार्मा जैसे कोर्सों में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर ठगी की। अभिनव शर्मा पहले भी जेल जा चुका है और सहारनपुर पेशी से फरार हो गया था।
अभिनव और संतोष अलग-अलग पहचान लेकर सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अपनी एडमीशन कंसल्टेंसी का विज्ञापन करते थे। ये अपने ऑफिस में बच्चों और उनके अभिभावकों को कॉल कर झांसा देते थे और हिंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के नाम से डिमांड ड्राफ्ट, ऑनलाइन या नकद पैसे लेते थे। नीट परीक्षा पास छात्रों जिनकी मेरिट कम थी या जिन्हें काउंसलिंग में एडमिशन नहीं मिला, उनके डेटा का इस्तेमाल करके ये लाखों रुपये वसूलते थे।
अभिनव शर्मा ने ठगी से कमाए पैसों से छह देशों-सऊदी अरब, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, थाईलैंड और स्विट्जरलैंड की यात्रा की। लखनऊ में वह चिनहट स्थित एक 70 हजार रुपए किराए के पेंट हाउस में रहता था और विजयंतखंड में अपने स्टडी पाथवे कंसल्टेंसी ऑफिस में 50 कर्मचारियों के साथ काम करता था। ऑफिस में फोन जमा करवा कर खुद कम ही बैठता था और किसी क्लाइंट के आने पर कॉल पर ही दिख जाता था।
पीड़ित विजय बहादुर के मुताबिक उन्होंने अपने भांजे के एडमिशन के लिए 28 जुलाई 2025 को 15 लाख रुपए और 2 अक्टूबर 2025 को 30 लाख रुपए ऑफिस में दिए। ठगों ने 55 लाख रुपए की रसीद दी और अतिरिक्त 10 लाख रुपए की मांग भी की। 29 अक्टूबर को एडमिशन रिजल्ट नहीं आया तो विजय ने संपर्क किया, तब सभी नंबर बंद मिले। अन्य पीड़ितों राजेश वर्मा से 20 लाख, दीप सिंह से 38 लाख और प्रीति सिंह से 23 लाख रुपए की ठगी की गई थी।






