न्यूज डेस्क, 7 मार्च 2026:
भारत के पड़ोसी नेपाल के आम चुनाव में मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों ने देश की राजनीति में बड़े उलटफेर का संकेत दिया है। रैपर से नेता बने काठमांडू के पूर्व महापौर बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) प्रचंड जीत की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। रुझानों के अनुसार आरएसपी ने अब तक 41 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है और 86 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इस प्रदर्शन ने नेपाल की पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों को बड़ा झटका दिया है। संकेत मिल रहे हैं कि बालेन शाह देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
जनवरी तक काठमांडू के मेयर रहे बालेन शाह ने इस चुनाव में कई दिग्गज नेताओं को कड़ी चुनौती दी। उनके सामने नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली तथा नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गगन थापा जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी थे।
आरएसपी ने काठमांडू जिले की सभी 10 सीटों सहित राजधानी क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया है। इसके अलावा पार्टी देश के अन्य कई क्षेत्रों में भी बढ़त बनाए हुए है। वहीं अब तक के परिणामों के अनुसार नेपाली कांग्रेस को 6 सीटें, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को 2 सीटें, सीपीएन (यूएमएल) को 2 सीटें और अन्य को 1 सीट हासिल हुई है।

इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश तब मिला जब बालेन शाह ने चार बार प्रधानमंत्री रह चुके सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के गढ़ झापा-5 में उन्हें भारी मतों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की। ओली की यह हार नेपाल की राजनीति में बड़ा झटका मानी जा रही है।
वहीं राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने चितवन-2 सीट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है। लामिछाने को 54,402 वोट मिले, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी नेपाली कांग्रेस की नेता मीना खरेल को 14,564 वोटों से संतोष करना पड़ा। हालांकि नेपाल की राजनीति के अनुभवी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करते हुए रुकुम ईस्ट-1 सीट से जीत हासिल की है। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी लीलामणि गौतम को 10,240 वोटों के अंतर से हराया।
नेपाल चुनाव आयोग के अनुसार सभी सीटों की मतगणना 9 मार्च तक पूरी होने की संभावना है। मुख्य चुनाव आयुक्त राम प्रसाद भंडारी के मुताबिक 165 सीटों की गिनती पूरी होने के 24 घंटे के भीतर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। आयोग का दावा है कि इस बार मतगणना पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी तरीके से कराई जा रही है।
गौरतलब है कि पिछले 18 वर्षों में नेपाल में 14 सरकारें बन चुकी हैं। ऐसे में इस बार के चुनावी रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि जनता पारंपरिक दलों से हटकर नई राजनीतिक ताकतों को मौका देने के मूड में है।






