Lucknow City

किसान पंचायत में नए संगठन का ऐलान…38 जिलों में सक्रिय होगी ‘भारतीय किसान क्रांति यूनियन’

जिलों में पदाधिकारियों की नियुक्ति का दावा, MSP की कानूनी गारंटी समेत 11 सूत्रीय मांगपत्र जल्द सौंपने की तैयारी

एमएम खान

मोहनलालगंज (लखनऊ), 24 मार्च 2026:

मंगलवार को क्षेत्र के एक निजी गेस्ट हाउस में किसान पंचायत में भारी संख्या में भीड़ जुटी। इस दौरान नए संगठन ‘भारतीय किसान क्रांति यूनियन’ के गठन का ऐलान किया गया। संगठन की कमान एडवोकेट ऋषि मिश्रा ने संभाली। पंचायत में संगठन को मजबूत और सक्रिय करने की रणनीति पर चर्चा की गई।

पंचायत में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए किसानों के बीच संगठन के विस्तार और रणनीति पर चर्चा हुई। आयोजन के दौरान बताया गया कि 38 जिलों में जिलाध्यक्ष और मंडल स्तर के पदाधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है, जिससे संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने की योजना है।

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ऋषि मिश्रा ने कहा कि संगठन किसानों के अधिकारों को लेकर काम करेगा। उन्होंने बताया कि वह पहले किसान यूनियन भानु गुट में प्रदेश प्रभारी रहे, लेकिन अलग मंच बनाकर किसानों की आवाज को और मजबूती देने का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर किसानों के मुद्दों को सड़क से लेकर सदन तक उठाया जाएगा।

राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल वर्मा ने कहा कि संगठन की ताकत एकजुटता में है और किसानों को अपने अधिकारों के लिए एक मंच पर आना होगा। बैठक में किसानों से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। संगठन की ओर से प्रधानमंत्री को 11 सूत्रीय ज्ञापन देने की तैयारी है। इसमें फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी की नीति, सिंचाई व्यवस्था में सुधार और नहरों में नियमित पानी की मांग शामिल है।

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इसके साथ बिजली, सड़क और पानी की समस्याएं भी उठाई गईं। किसानों ने ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति बेहतर करने, खराब सड़कों की मरम्मत और पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग रखी। आवारा पशुओं से फसलों को नुकसान, बाढ़ प्रभावित इलाकों में बांधों की निगरानी, राजस्व मामलों के समयबद्ध निस्तारण जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे। नामांतरण, पैमाइश और खतौनी से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की गई।

संगठन ने उर्वरक, बीज और कृषि उपकरण समय पर उपलब्ध कराने, गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने और 14 दिन में भुगतान सुनिश्चित करने की बात भी रखी। इसके अलावा गौवंश के गोबर की खरीद कर जैविक खाद बनाने और प्रशासनिक कार्यशैली में पारदर्शिता लाने की मांग भी शामिल है। कार्यक्रम में तय किया गया कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर आगे आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।

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