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लोकसभा में ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश…10 घंटे बहस के बाद होगा मतदान

कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने लगाया था पक्षपात का आरोप, 118 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ फरवरी में दिया गया था नोटिस

नई दिल्ली, 10 मार्च 2026:

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए विपक्ष की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव मंगलवार को सदन में पेश कर दिया गया। प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया। इस पर लोकसभा में करीब 10 घंटे तक चर्चा तय की गई है, जिसके बाद मतदान कराया जाएगा।

यह प्रस्ताव मुख्य रूप से कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया की ओर से लाया गया है। विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष पर सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने, विपक्षी सांसदों को बोलने से रोकने और निष्पक्षता नहीं बरतने का आरोप लगाया है।

118 सांसदों ने किया प्रस्ताव का समर्थन

विपक्ष ने इस प्रस्ताव का नोटिस फरवरी 2026 में दिया था। नोटिस पर करीब 118 सांसदों के हस्ताक्षर बताए गए हैं। प्रस्ताव को पेश करने वालों में कांग्रेस के मोहम्मद जावेद, कोडिकुनिल सुरेश और मल्लू रवि प्रमुख रूप से शामिल हैं।

संसदीय प्रक्रिया के अनुसार पीठासीन सभापति के बुलाने पर कम से कम 50 सांसदों को प्रस्ताव के समर्थन में खड़ा होना होगा। यदि 50 सदस्य समर्थन में खड़े होते हैं तो प्रस्ताव सदन के विचार के लिए स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके बाद इस पर चर्चा और फिर मतदान कराया जाएगा।

बहस के लिए 10 घंटे का समय तय

सदन की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष की कुर्सी संभाल रहे भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने बताया कि इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय तय किया गया है। उन्होंने सांसदों से नियमों के अनुसार चर्चा में भाग लेने का आग्रह किया।

उपाध्यक्ष पद को लेकर भी उठा मुद्दा

चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कई वर्षों से लोकसभा में उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है। उनके मुताबिक इससे संवैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं रह जाती और सदन को ऐसा सदस्य चुनना चाहिए जो प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कार्यवाही की अध्यक्षता कर सके।

सत्ता और विपक्ष ने जारी किया व्हिप

इस मुद्दे पर चर्चा और मतदान के दौरान सभी सांसदों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने लोकसभा सदस्यों को व्हिप जारी किया है। हालांकि सदन में संख्या बल सत्तापक्ष के पक्ष में अधिक होने के कारण माना जा रहा है कि प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम है।

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