अयोध्या, 3 फरवरी 2026:
अयोध्या में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर विवाद और गहरा गया है। यहां तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभालते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अयोध्या में प्रवेश न करने देने की चेतावनी दी है। परमहंस आचार्य ने कहा कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने बयान वापस नहीं लेते, तब तक उन्हें अयोध्या में कदम रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सीएम योगी पर टिप्पणी से भड़के परमहंस आचार्य
जगद्गुरु परमहंस आचार्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर की गई कथित अभद्र टिप्पणी से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी को औरंगजेब और हुमायूं का बेटा कहना बेहद निंदनीय है और एक संत को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती। परमहंस आचार्य का कहना है कि योगी आदित्यनाथ सनातन धर्म और उत्तर प्रदेश के हित में लगातार काम कर रहे हैं और इस तरह की टिप्पणियां पूरी तरह अस्वीकार्य हैं।

माफी तक अयोध्या में प्रवेश पर रोक
परमहंस आचार्य ने साफ कहा कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शब्द वापस नहीं लेते और मुख्यमंत्री योगी से सार्वजनिक रूप से क्षमा नहीं मांगते, तब तक उन्हें अयोध्या में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का गाय को लेकर चलाया जा रहा आंदोलन राजनीतिक सोच से प्रेरित है और इसका मकसद विपक्ष को फायदा पहुंचाना है।
बयान वापसी तक बहिष्कार की अपील
परमहंस आचार्य ने आगे कहा कि भगवा पहनकर इस तरह की भाषा और बयानबाजी करना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे पूरे संत समाज की मर्यादा को ठेस पहुंचती है। उन्होंने कहा कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने बयान सार्वजनिक रूप से वापस नहीं लेते, तब तक सभी सनातनी समाज को उनका बहिष्कार करना चाहिए।
राष्ट्र माता का दर्जा कब मिलेगा: जगद्गुरु परमहंस आचार्य
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि वर्षों से गाय को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग उठ रही है, लेकिन इसके बावजूद आज भी बछड़ों और बैलों की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लागू नहीं हो सका है। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार से गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि गौहत्या पर बिना किसी छूट के सख्त कानून बनाया जाना चाहिए और उसकी प्रभावी निगरानी होनी चाहिए। इसके साथ ही परमहंस आचार्य ने गांवों में गौरक्षा के लिए स्थायी और मजबूत तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई।





