Uttar Pradesh

नोएडा एयरपोर्ट बना आत्मनिर्भर भारत का इंजन, MRO हब से बदलेगी भारत की एविएशन तस्वीर

अब विदेश नहीं जाएंगे 85% विमान, यूपी में रोजगार और निवेश का नया केंद्र बनेगा जेवर, भारत का एमआरओ बाजार 2030 तक 5.7 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद

नोयडा/लखनऊ, 29 मार्च 2026:

यूपी का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब देश के एविएशन सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव की पटकथा लिखने जा रहा है। यहां विकसित होने वाला अत्याधुनिक मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) हब भारत को विमान रखरखाव के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। शनिवार को पीएम मोदी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास करने के साथ इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजबूत स्तंभ बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान में भारत के लगभग 85% विमान मेंटेनेंस के लिए विदेश भेजे जाते हैं। इससे देश की बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर चली जाती है। उन्होंने इस स्थिति को बदलने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि देश में विश्वस्तरीय एमआरओ सुविधाओं का विकास अब समय की मांग है।

नोएडा एयरपोर्ट परिसर में अकासा एयर के सहयोग से स्थापित होने वाला यह एमआरओ हब आधुनिक तकनीक और वैश्विक मानकों से लैस होगा। यहां विमान रखरखाव, मरम्मत और तकनीकी सेवाओं का व्यापक नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इसके शुरू होने से एयरलाइंस कंपनियों को अपने विमानों को विदेश भेजने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी। इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी।

यह परियोजना तकनीकी दृष्टि के साथ ही आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। एमआरओ हब के निर्माण से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। युवाओं को एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, एविएशन टेक्नोलॉजी और संबंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षण मिलने से उनकी कौशल क्षमता भी बढ़ेगी।

सीएम योगी की निवेश और प्रोत्साहन नीतियों के चलते यूपी में इस तरह की हाईटेक परियोजनाओं को तेजी मिल रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एक समग्र एविएशन और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें एमआरओ सुविधा अहम भूमिका निभाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत का एमआरओ बाजार 2030 तक 5.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। केंद्र सरकार की एमआरओ नीति 2021 के तहत करों में छूट और भूमि पट्टे में रियायत जैसे कदम इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रहे हैं।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें तो अमेरिका एमआरओ सेक्टर में अग्रणी है। इसके साथ ही यूरोप और एशिया प्रशांत क्षेत्र में भी कई बड़े केंद्र विकसित हो चुके हैं। ऐसे में नोएडा एयरपोर्ट का यह एमआरओ हब भारत को वैश्विक एविएशन सर्विस मार्केट में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

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