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लोकतंत्र का बल संवाद में, गतिरोध में नहीं : पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बोले ओम बिरला

अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन सत्र को लोकसभा अध्यक्ष ने किया संबोधित, कहा-आखिरी व्यक्ति की आवाज सदन तक पहुंचे, तभी मजबूत होगा लोकतंत्र

लखनऊ, 21 जनवरी 2026:

यूपी विधानभवन परिसर में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन सत्र को बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने संबोधित किया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ने लोकतांत्रिक संस्थाओं में संवाद, सहमति और सार्थक विमर्श को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदन का समय अत्यंत कीमती होता है। उसका सदुपयोग जनहित में होना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सदन में सहमति और असहमति लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन गतिरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सदन में कभी ठहराव की स्थिति न बने।

उन्होंने कहा कि पीठासीन अधिकारी के रूप में निष्पक्षता और न्यायसंगत आचरण हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
ओम बिरला ने कहा कि राज्य विधानसभाएं वह मंच हैं जहां अंतिम व्यक्ति की आवाज सरकार तक पहुंचती है। जैसे न्यायालयों में जनता का विश्वास होता है। उसी प्रकार यदि जनप्रतिनिधि सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी बात रखें तो विधानमंडलों के प्रति भी जनता का भरोसा और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि उन बहसों से ठोस और परिणामकारी निर्णय निकलना ही उसकी वास्तविक सफलता है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएं संवाद और विमर्श के माध्यम से ही सुदृढ़ होती हैं और समाज को आगे बढ़ाने का कार्य करती हैं। विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए आवश्यक है कि सभी राज्य अपने-अपने स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करें। इसके लिए समाज के विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों को गंभीरता से सुनना और उन्हें नीति निर्माण में शामिल करना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि लोकतांत्रिक सरकारों को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विधायी प्रक्रियाओं को सशक्त करने और विपक्ष की भूमिका को प्रभावी बनाने के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। आने वाले समय में यह सुनिश्चित करने का प्रयास होगा कि राज्य विधानसभाओं की न्यूनतम 30 बैठकें हों, ताकि जनहित के मुद्दों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हो सके।

ओम बिरला ने कहा कि मतदाता यह अपेक्षा करता है कि उसका चुना हुआ प्रतिनिधि अगले पांच वर्षों तक उसकी समस्याओं को सदन में उठाएगा और समाधान के लिए प्रयास करेगा। उन्होंने विधानसभा को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए आधुनिक तकनीक, डिजिटल माध्यमों और एआई के उपयोग पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार नई प्रक्रियाएं, प्रभावी संसदीय समितियां और राज्यों के बीच आपसी संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करेंगे। सम्मेलन के दौरान देशभर से आए पीठासीन अधिकारियों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।

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