लखनऊ, 28 नवंबर 2025:
राजधानी लखनऊ के सुल्तानपुर रोड स्थित गुलजार उपवन में शुक्रवार को ब्रह्मकुमारीज संस्थान द्वारा राज्यस्तरीय ध्यान योग कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि विज्ञान और तकनीक ने भले ही इंसान को आगे बढ़ाया है, लेकिन एकाकीपन, ईर्ष्या, अविश्वास और दुख भी तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में मेडिटेशन जीवन की चुनौतियों का प्रभावी समाधान बन सकता है।

विश्व एकता एवं विश्वास के लिए ध्यान (योग) विषयक इस कार्यक्रम में प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व सीएम योगी की मौजूदगी में राष्ट्रपति ने ‘ओम शांति’ कहकर अपना संबोधन शुरू किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि विज्ञान और तकनीक ने भले ही इंसान को आगे बढ़ाया है, लेकिन एकाकीपन, ईर्ष्या, अविश्वास और दुख भी तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में मेडिटेशन जीवन की चुनौतियों का प्रभावी समाधान बन सकता है। उन्होंने कहा कि केवल प्रगति ही नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झांकना भी जरूरी है। स्वस्थ विचार और स्वच्छ भावनाओं से ही विश्वास टिकता है। जब आत्मिक चेतना जागृत होती है तो प्रेम, विश्वास और भाईचारा जैसे गुण स्वतः विकसित हो जाते हैं।
राष्ट्रपति ने ब्रह्मकुमारीज द्वारा विश्वभर में शांति, सुख और प्रेम का संदेश पहुंचाने और नारी सशक्तिकरण एवं शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। बच्चियों ने मयूर नृत्य प्रस्तुत कर राष्ट्रपति का स्वागत किया। कार्यक्रम में दीदियों को कलश एवं भाइयों को ध्वजा देकर सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ध्यान योग को लेकर शुरू हो रहा यह विशाल अभियान पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। राष्ट्रपति की उपस्थिति इसे और भी विशेष बनाती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू ने पार्षद से लेकर राष्ट्रपति तक का लंबा सफर तय कर समाज में प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। सीएम योगी ने ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़े सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि राजयोग सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और समाज को जोड़ने का माध्यम है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि वर्ष 1937 में जब समाज अनेक व्याधियों से घिरा था, तब इस संस्था की नींव रखी गई। आज यह विश्व स्तर पर नारी शक्ति द्वारा संचालित एक विशाल संगठन है जो राष्ट्र निर्माण की विविध गतिविधियों में सक्रिय है। राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति को सद्गुणों की ओर ले जाता है। शांति, पवित्रता और सुख जैसे गुण स्वतः ही विकसित होने लगते हैं। मेडिटेशन हमें यह बोध कराता है कि आत्मा अमर और अविनाशी है। यह केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि सकारात्मक जीवन शैली है। राज्यपाल ने कहा कि आध्यात्मिक अनुभव से मृत्यु का भय पीछे छूट जाता है और जीवन में परिवर्तन लाने की शक्ति मिलती है। परिस्थितियों को दोष देने की आदत खत्म होती है और व्यक्ति स्वयं को सुनना तथा शांत रहना सीखता है।






