लखनऊ, 15 फरवरी 2026:
अयोध्या में राममंदिर से जुड़े विकास कार्यों और दीपोत्सव की दिव्यता अब सात समंदर पार तक अपनी चमक बिखेर रही है। प्रदेश सरकार के सांस्कृतिक विजन और अयोध्या में हुए आध्यात्मिक नवजागरण से प्रेरित होकर 20 फरवरी को मॉस्को में भव्य रामलीला का मंचन होने जा रहा है। इसे भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है जहां भारतीय परंपरा की जीवंत प्रस्तुति रूसी कलाकारों के अभिनय से सजीव होगी।
यह आयोजन रूस में भारत के दूतावास और जवाहरलाल नेहरू सांस्कृतिक केंद्र के सहयोग से हो रहा है। मंच पर राम की भूमिका एवगेनी, सीता के रूप में दारिया, लक्ष्मण के रूप में मुरात और हनुमान के रूप में दिमित्री निभाएंगे। पारंपरिक वेशभूषा, सजीव मंच सज्जा और भारतीय संगीत के साथ रामकथा का मंचन रूसी दर्शकों के लिए एक अनोखा सांस्कृतिक अनुभव बनेगा। आयोजकों के अनुसार यह रामलीला केवल धार्मिक प्रस्तुति नहीं बल्कि सत्य, मर्यादा और आदर्श जीवन के सार्वभौमिक संदेश का संप्रेषण है। यही वजह है कि रूसी समाज में भी इसके प्रति उत्सुकता बढ़ रही है।

अयोध्या का दीपोत्सव वैश्विक पहचान बना चुका है। लाखों दीपों से जगमगाती अयोध्या की तस्वीरों ने दुनिया भर के सांस्कृतिक संगठनों और कलाकारों को प्रभावित किया है। हाल ही में योगी सरकार ने रूसी कलाकारों की टीम को अयोध्या दीपोत्सव में मंच प्रदान किया था जहां उनकी रामलीला प्रस्तुति को सराहना मिली। अयोध्या की आध्यात्मिक आभा और आयोजन की भव्यता से प्रभावित होकर कलाकारों और आयोजकों ने मॉस्को में भी उसी भाव को साकार करने का निर्णय लिया।
भारत-रूस सांस्कृतिक रिश्तों में रामलीला की परंपरा का इतिहास भी उल्लेखनीय है। 1960 के दशक में सोवियत अभिनेता गेनादी मिखाइलोविच पेचनिकोव ने मॉस्को में रामलीला का मंचन कर दोनों देशों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को नई ऊंचाई दी थी। मौजूदा आयोजन उसी परंपरा को आधुनिक संदर्भ में आगे बढ़ा रहा है। आयोजन से जुड़े रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में रूसी-भारतीय मैत्री संस्था ‘दिशा’ वर्षों से नाट्य प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक उत्सवों और शैक्षिक पहलों के जरिए दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु बना रही है।
रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार के विशेष सहयोग से हो रहे इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रूसी नागरिक, भारतीय समुदाय और सांस्कृतिक जगत की हस्तियां शामिल होंगी। 20 फरवरी को जब मंच पर श्रीराम की लीला सजीव होगी तो मॉस्को का वातावरण भारतीय संस्कृति की भक्ति, मर्यादा और आदर्शों से सराबोर नजर आएगा।






