लखनऊ, 2 फरवरी 2026:
संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट में यूपी को पर्यटन के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिली है। बजट में प्रदेश के दो प्रमुख पुरातात्विक स्थलों सारनाथ और हस्तिनापुर को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही टूरिज्म से जुड़े स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और प्रशिक्षण संस्थानों के विस्तार से उत्तर प्रदेश में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
देश के 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को जीवंत अनुभव आधारित वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव में सारनाथ और हस्तिनापुर को शामिल किया गया है। वाराणसी स्थित सारनाथ बौद्ध धर्म का अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। यहां धमेख स्तूप, चौखंडी स्तूप और सिंह शीर्ष वाला अशोक स्तंभ स्थित है, जिससे भारत के राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न की प्रेरणा मिली। इसके अलावा मौर्य, गुप्त और पाल काल की मूर्तियों तथा बौद्ध विहारों के अवशेष इस स्थल की ऐतिहासिक महत्ता को और सुदृढ़ करते हैं।

वहीं मेरठ जिले में स्थित महाभारत कालीन हस्तिनापुर भारतीय सभ्यता की प्राचीन धरोहर का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां से महाभारत और हड़प्पा काल की पॉटरी एवं अन्य पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए हैं। पांडव टीला और कर्ण मंदिर जैसे स्थल इसे धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। इन दोनों स्थलों के विकास से एक ओर पूर्वी उत्तर प्रदेश में वाराणसी क्षेत्र और दूसरी ओर पश्चिमी यूपी के मथुरा-मेरठ बेल्ट में पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
बजट की एक और अहम घोषणा आईआईएम के सहयोग से 10,000 टूरिस्ट गाइडों को प्रशिक्षित करने की है। इसके तहत देश के 20 आइकॉनिक पर्यटन स्थलों पर पायलट प्रोग्राम चलाया जाएगा, जिसमें प्रोफेशनल स्किल्स, भाषा ज्ञान और डेस्टिनेशन नॉलेज पर विशेष फोकस रहेगा। इससे उत्तर प्रदेश जैसे पर्यटन-समृद्ध राज्य में हजारों युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
इसके अलावा नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड की स्थापना से प्रदेश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत का डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन होगा। साथ ही टूरिज्म ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी के अपग्रेडेशन से हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट को मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर, यह बजट उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।






