लखनऊ, 3 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कुकरैल नाइट सफारी में लखनऊ चिड़ियाघर (नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान) को स्थानांतरित करने की योजना पर रोक लग गई है। सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि लखनऊ चिड़ियाघर को मौजूदा स्थान पर ही बनाए रखना पर्यावरण और सामाजिक दोनों दृष्टि से जरूरी है। समिति ने चिड़ियाघर को शहर का ‘ग्रीन लंग’ बताते हुए इसके संरक्षण पर जोर दिया है।
सीईसी की रिपोर्ट के बाद कुकरैल नाइट सफारी तक प्रस्तावित चार लेन सड़क निर्माण पर भी रोक लगा दी गई है। अब इस मार्ग पर चार लेन की जगह केवल दो लेन सड़क बनेगी। इससे इलाके में होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
पीडब्ल्यूडी ने 17 फरवरी 2025 को नाइट सफारी तक चार लेन सड़क के लिए टेंडर जारी किया था। समिति ने अपनी आपत्ति में बताया कि इस योजना से 700 से अधिक पेड़ों की कटाई करनी पड़ती। इसी कारण शासन ने चार लेन सड़क का प्रस्ताव रद्द कर दिया है और अब पीडब्ल्यूडी से दो लेन सड़क का नया प्रस्ताव मांगा गया है। फिलहाल सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
लखनऊ चिड़ियाघर प्रशासन ने बढ़ते ट्रैफिक और वन्यजीवों में जेनेटिक बीमारियों के खतरे का हवाला देते हुए चिड़ियाघर को बाहर शिफ्ट करने का सुझाव दिया था। हालांकि सीईसी ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। समिति ने कहा कि देश में 21 चिड़ियाघर शहरों के भीतर ही संचालित हो रहे हैं और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के स्वास्थ्य नियम पहले से लागू हैं।
सीईसी ने स्पष्ट किया कि चिड़ियाघर को हटाने की बजाय मौजूदा स्थान पर ही आधुनिक बनाना ज्यादा उपयुक्त है। जगह की कमी, पर्यटकों का दबाव और विकास में कठिनाई जैसे तर्क जांच में सही नहीं पाए गए। समिति ने यह भी चेतावनी दी कि कुकरैल नाइट सफारी में गतिविधियां बढ़ने से शोर, अशांति और प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंच सकता है। सीईसी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को सौंप दी है। अंतिम निर्णय अदालत द्वारा लिया जाएगा, जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।






