लखनऊ, 26 फरवरी 2026:
शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता से छूट देने की मांग को लेकर गुरुवार को यूपी की राजधानी लखनऊ के निशातगंज स्थित बीएसए कार्यालय परिसर में सैकड़ों शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले जुटे शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया।
प्रदर्शन का नेतृत्व उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुधांशु मोहन और उत्तर प्रदेश जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. प्रभाकांत मिश्र ने किया। शिक्षकों ने प्रशासन के माध्यम से नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजते हुए मांग की कि आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की बाध्यता से मुक्त करने के लिए अध्यादेश लाकर संसद से कानून पारित कराया जाए।

शिक्षक नेताओं ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से लागू हुआ था। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार इसके लागू होने के बाद नियुक्त होने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य था, जबकि इससे पहले नियुक्त शिक्षकों को इस शर्त से मुक्त रखा गया था। लेकिन हालिया सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद देशभर में आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर भी सेवा में बने रहने और पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण करने की बाध्यता लागू कर दी गई है।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर अचानक यह शर्त थोपना अन्यायपूर्ण है। इससे न केवल उनके भविष्य पर संकट मंडरा रहा है बल्कि सरकारी विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। कई शिक्षकों ने कहा कि वे दशकों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं और अब परीक्षा की बाध्यता उनके मनोबल को तोड़ रही है।

शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेश से राष्ट्रीय स्तर तक और तेज किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार से संवेदनशीलता दिखाते हुए आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट देने की अपील की।






