Varanasi

काशी विश्वनाथ में गूंजा तमिल भक्ति का स्वर, तिरुवासगम पाठ से सजी आध्यात्मिक एकता की मिसाल

तमिलनाडु से आए 110 श्रद्धालुओं ने साढ़े पांच घंटे तक किया अखंड पाठ, काशी में दिखा संस्कृति और आस्था का अद्भुत संगम

विकास गोंड

वाराणसी, 30 मार्च 2026:

यूपी के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में सोमवार को एक अनूठा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन देखने को मिला। तमिलनाडु से आए श्रद्धालुओं के समूह ने प्राचीन तमिल शैव ग्रंथ ‘तिरुवासगम’ का संपूर्ण पाठ कर भगवान शिव की भक्ति में डूबा वातावरण निर्मित कर दिया।

इस विशेष प्रार्थना आयोजन में करीब 110 श्रद्धालुओं ने भाग लिया जो अम्माचियारम्मन तिरुवासगम संपूर्ण पाठ प्रार्थना समूह से जुड़े थे।समूह का नेतृत्व जी मुथुमदासामी ने किया। उनके निर्देशन में यह संपूर्ण अनुष्ठान अत्यंत अनुशासित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

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महान संत माणिक्कवाचगर द्वारा रचित माना जाने वाला तिरुवासगम तमिल भक्ति साहित्य का अत्यंत पूजनीय ग्रंथ है। इसमें कुल 658 भक्ति गीत शामिल हैं। इनका पाठ श्रद्धालुओं ने एक सतत क्रम में पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ किया। लगभग साढ़े पांच घंटे तक चले इस अखंड पाठ के दौरान मंदिर परिसर में तमिल भाषा में गूंजते भक्ति गीतों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

इस आयोजन की खास बात यह रही कि उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थ स्थल काशी में दक्षिण भारत की भक्ति परंपरा का ऐसा जीवंत संगम देखने को मिला जिसने भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता की भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का दर्शन-पूजन करने के साथ इस विशेष पाठ के माध्यम से अपनी गहरी आस्था व्यक्त की।

मंदिर प्रशासन द्वारा आयोजन के दौरान सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। यह आयोजन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ देश की सांस्कृतिक एकता का भी प्रेरक उदाहरण बना। यह विशेष प्रार्थना कार्यक्रम श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गया।

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