नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026:
सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) द्वारा 23 जनवरी को जारी किए गए “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ाने” वाले नए नियमों पर रोक लगा दी है। याचिकाकर्ताओं ने इन नियमों को मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान व UGC एक्ट, 1956 के खिलाफ बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि फिलहाल इन नियमों को लागू नहीं किया जाएगा और 2012 में बने पुराने नियम अब फिर से लागू होंगे।
दुरुपयोग की संभावना पर सवाल
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि नए नियम अस्पष्ट हैं और उनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। जस्टिस बागची ने विशेष रूप से नियमों में इस्तेमाल किए गए शब्दों पर सवाल उठाए और कहा कि यह समाज में निष्पक्ष और सबको साथ लेकर चलने वाले माहौल के खिलाफ हो सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह रोक नियमों की कानूनी वैधता और संवैधानिकता तय होने तक लागू रहेगी।
याचिकाकर्ताओं की आपत्ति
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ये नियम समानता के सिद्धांत के खिलाफ हैं और कुछ समूहों को बाहर कर सकते हैं। उनके वकील, विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में कहा कि वे UGC एक्ट की धारा 3(C) को असंवैधानिक मानते हैं। उनका तर्क है कि यह धारणा गलत है कि सामान्य श्रेणी के छात्र भेदभाव करते हैं।
सुनवाई और आगे की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 19 मार्च तय की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट यह तय करेगा कि नए नियम संविधान के अनुरूप हैं या नहीं और क्या इन्हें लागू किया जा सकता है। नए नियमों पर रोक के साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि 2012 में बने नियमों का पालन जारी रहेगा। इससे उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों के अधिकारों और समानता की सुरक्षा बनी रहेगी, जब तक नए नियमों की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता।






