लखनऊ, 8 जनवरी 2026:
योगी सरकार ने प्रदेश के दिव्यांगजनों के सर्वांगीण पुनर्वासन को नई रफ्तार देने के लिए एक अहम पहल शुरू की है। इसी के तहत “दिव्यांगजन के सर्वांगीण पुनर्वासन हेतु स्वैच्छिक संस्थाओं को सहायता योजना” लागू की गई है। इसके अंतर्गत योग्य स्वैच्छिक संस्थाओं को अनुदान दिया जाएगा, ताकि वे ज़मीनी स्तर पर पुनर्वासन से जुड़ी सेवाएं मुहैया करा सकें।
21 तरह की दिव्यांग श्रेणी में मिलेगी मदद
यह योजना दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में दर्ज 21 प्रकार की दिव्यांगताओं पर लागू होगी। मानसिक मंदता और गंभीर मानसिक बीमारी से जुड़े मामलों को इस योजना से बाहर रखा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि अलग-अलग ज़रूरतों वाले बच्चों और युवाओं को शुरुआती इलाज, पढ़ाई और प्रशिक्षण की सही सुविधा मिले।

शिक्षा से लेकर रोजगार तक सहारा
योजना के तहत कई अहम कामों को मदद दी जाएगी। इसमें अर्ली इंटरवेंशन सेंटर की स्थापना, डे-केयर और प्री-प्राइमरी स्कूलों का संचालन, विशेष विद्यालयों का संचालन, दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास कार्यक्रम, पाठ्य सामग्री का निर्माण, ब्रेल और सहायक उपकरणों की उपलब्धता तथा दिव्यांगजनों से संबंधित पुस्तकालयों का संचालन शामिल है। इन प्रयासों से बच्चों की शुरुआती पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की राह आसान होगी।
सरकार नहीं, समाज भी निभाएगा जिम्मेदारी
पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के राज्य मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि दिव्यांगजनों के पुनर्वासन में सिर्फ सरकारी तंत्र नहीं, बल्कि अनुभवी और समर्पित संस्थाओं की भागीदारी भी जरूरी है। इसी वजह से स्वैच्छिक संस्थाओं को पारदर्शी और तकनीक आधारित प्रक्रिया से योजना में जोड़ा जा रहा है।
कौन-सी संस्थाएं होंगी पात्र
अनुदान के लिए वही संस्थाएं आवेदन कर सकेंगी जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत पंजीकृत हों, जिनका एनजीओ दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण हो, जिनके पास कम से कम दो साल का अनुभव हो और जो दिव्यांगजनों के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रही हों।
जांच के बाद मिलेगा अनुदान
प्रस्तावों की पहले जिला स्तर पर जांच होगी, फिर निदेशालय की स्क्रीनिंग कमेटी अंतिम फैसला लेगी। इससे यह तय होगा कि मदद सिर्फ उन्हीं संस्थाओं को मिले जो वाकई ज़मीनी स्तर पर असरदार काम कर रही हैं।
हर जिले में होगा प्रचार
सरकार ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना की जानकारी हर जिले तक पहुंचाई जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा संस्थाएं आगे आएं और दिव्यांगजनों के पुनर्वासन में भागीदार बनें।






