न्यूज डेस्क, 16 मार्च 2026:
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के बाधित होने से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। एक ओर ईरान लगातार क्षेत्र में अमेरिकी और इस्राइली ठिकानों को निशाना बना रहा है तो दूसरी ओर अमेरिका के भीतर भी इस संघर्ष को लेकर विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। ऐसे हालात में ट्रंप को अपने पारंपरिक सहयोगी देशों से भी अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पा रहा है।
इसी मुद्दे पर एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने नाटो (North Atlantic Treaty Organization) के सहयोगी देशों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जो देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आर्थिक लाभ उठाते हैं उन्हें इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी साझा करनी चाहिए। ट्रंप ने कहा कि यह बिल्कुल उचित है कि जो देश इस मार्ग से फायदा लेते हैं वे यह सुनिश्चित करें कि वहां कुछ भी गलत न हो।
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सहयोगी देश इस संकट में अमेरिका का साथ नहीं देते हैं तो यह नाटो के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के मामले में अमेरिका को सहयोगियों की जरूरत नहीं पड़ी लेकिन अब देखना होगा कि क्या वे अमेरिका की मदद के लिए आगे आते हैं या नहीं।
दरअसल, अमेरिका चाहता है कि सहयोगी देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बारूदी सुरंगों को साफ करने और समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए अपने युद्धपोत तैनात करें। ट्रंप पहले भी कह चुके हैं कि अमेरिका नाटो के लिए हमेशा तैयार रहता है लेकिन अब यह देखना होगा कि कौन-कौन से देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खुला रखने में साथ देते हैं।
पश्चिम एशिया में हालात इसलिए भी जटिल बने हुए हैं क्योंकि ईरान पर दबाव बढ़ाने के बावजूद वह पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा। देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित कई शीर्ष नेताओं की मौत के बाद भी अमेरिकी ठिकानों और इस्राइल पर ईरान हमले जारी रखे हुए है। वहीं अमेरिका और इस्राइल की ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश भी सफल होती नहीं दिख रही।
होर्मुज स्ट्रेट में बाधा के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है। अमेरिकी तेल कंपनियों ने ट्रंप प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की अपील की है। ट्रंप ने करीब सात देशों से युद्धपोत भेजने की मांग की है लेकिन ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे करीबी सहयोगी फिलहाल इससे सहमत नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया संकट ने अमेरिका की रणनीतिक चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।






