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यूजीसी : स्वामी प्रसाद ने भाजपा पर दागे सवाल, कहा…नीयत साफ तो मजबूत पैरवी क्यों नहीं की

मीडिया से रूबरू हए अपनी जनता पार्टी के मुखिया स्वामी प्रसाद मौर्या, कहा यूजीसी नियमों में बदलाव राजनीतिक फायदे की कोशिश

लखनऊ, 30 जनवरी 2026:

लखनऊ में अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार के यूजीसी कानून 2026 पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि जिस कानून को एससी, एसटी और ओबीसी के हित में बताया गया, उसी कानून की सुप्रीम कोर्ट में पैरवी में सरकार गायब दिखी। मौर्य ने कहा कि अगर सरकार की नीयत सही थी, तो अदालत में मजबूती से पैरवी क्यों नहीं की गई?

मीडिया से रूबरू हुए मौर्य का कहना था कि अगर कानून सही था, तो सरकार ने सीनियर वकील क्यों नहीं उतारे? क्या जानबूझकर कमजोर पैरवी कराई गई ताकि कानून रुक जाए और सरकार दोनों तरफ से बच जाए? उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब विश्वविद्यालयों में 90 से 95 प्रतिशत भर्तियां जनरल कैटेगरी के छात्रों की हो रही हैं, तो फिर एससी, एसटी और ओबीसी के लिए यह कानून किस काम का है?

स्वामी प्रसाद मौर्य ने यूजीसी कानून 2026 को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इस कानून के जरिये केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव को रोकने का दावा किया था, लेकिन अब यह कानून सुप्रीम कोर्ट की रोक के दायरे में है। यूजीसी कानून का स्टे सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि अब एक राजनीतिक बहस बन चुका है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस कानून को सिर्फ एससी, एसटी और ओबीसी को खुश करने का एक राजनीतिक कदम समझा, जिससे इन वर्गों में भ्रम और असंतोष फैला रहे हैं। मौर्य ने यह भी पूछा कि जब विश्वविद्यालयों में भर्तियां एक वर्ग विशेष की हो रही हैं, तो फिर यूजीसी कानून 2026 का उद्देश्य क्या है? सांप भी मर जाए, लाठी भी न टूटे। भाजपा एससी, एसटी, ओबीसी और सर्वसमाज को आपस में लड़ाकर राजनीतिक फायदा लेना चाहती है।

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